नीरव प्रतिध्वनि
हॉल तालियों से गूँज उठा, सर्कस में निशानेबाज की बन्दूक से निकली पहली ही गोली ने सामने टंगे खिलौनों में
Read Moreहॉल तालियों से गूँज उठा, सर्कस में निशानेबाज की बन्दूक से निकली पहली ही गोली ने सामने टंगे खिलौनों में
Read Moreउसने स्वप्न में स्वयं को सोये हुए देखा, उसके आसपास और भी कई लोग सो रहे थे। दायरा बढ़ता गया
Read Moreकैसे हो तुम? उम्मीद है तुम्हारी दुनिया अब भी उसी मद्धम सी रोशनी और सुकून भरी ख़ामोशी में बसती होगी,
Read Moreमहानगर के उस सबसे व्यस्त चौराहे पर, जहाँ ज़िंदगी रोबोटिक रफ़्तार से दौड़ती है, लाल बत्ती की हर एक चीख़
Read Moreवो पुरानी सफेद हवेली, जिसका नक्काशीदार लकड़ी का दरवाजा पिछले दस साल से बंद पड़ा था। मोहल्ले के बच्चे उसे
Read Moreबी.एड. कॉलेज की वह विशाल इमारत, हरे-भरे मैदान और कैंपस का वह पुराना पीपल का पेड़… जहाँ ज़िंदगी अपनी पूरी
Read Moreउस सरकारी कार्यालय में लंबी लाइन लगी हुई थी। खिड़की पर जो क्लर्क बैठा हुआ था, वह तल्ख़ मिजाज़ का
Read More“बधाई हो, बच्चा हुआ है।” हर बार की तरह जनाना हस्पताल की उस उपचारिका ने प्रसव के बाद इन्हीं शब्दों
Read More