कहानी – आखिरी टिकट
स्टेशन उस शाम असामान्य रूप से भरा हुआ था। बरसात अभी-अभी थमी थी और प्लेटफ़ॉर्म की भीगी ज़मीन पर भागते
Read Moreस्टेशन उस शाम असामान्य रूप से भरा हुआ था। बरसात अभी-अभी थमी थी और प्लेटफ़ॉर्म की भीगी ज़मीन पर भागते
Read Moreवह चौबीस साल की उम्र का अलबेलापन था, जब जिंदगी सिर्फ स्कूल के ब्लैक बोर्ड, चाक की धूल और चंद
Read More“विनीता जी, आपके पिताजी दुर्घटनाग्रस्त होकर हमारे अस्पताल में भर्ती हैं, आप जल्दी आइए.” सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने फोन
Read Moreपैसा…पैसा….हर पल केवल व्यापार की चिंता। न समय पर सोना, न खाना। घर परिवार में सारे ऐषो आराम का इंतजाम
Read Moreशाम के साए ज़रा गहरे हो चुके थे। रेलवे स्टेशन के मुसाफ़िरख़ाने में बत्तियों की मद्धम रोशनी फैली हुई थी।
Read Moreआज बहुत दिनों बाद मिस्टर शर्मा पार्क पर दिखाई दिये। वे मेरे पास आकर मुझ से हाथ मिलाने लगे तो
Read Moreकमली बैठे-बैठे जलते तवे को घूर रही थी । शराबी पति की हाड़ तोड़ती मार खाकर रोटी बनाने का किसका
Read Moreसालों बीत गए। शहर के उस मशहूर बीएड कॉलेज की वो चहल-पहल, वो नई उम्र, नए अहसास और आंखों में
Read Moreसाहित्यिक पटलों के माध्यम से संपर्क में आने और महज दो-तीन बार के आभासी संवाद के बाद नीलिमा ने राज
Read Moreरास्ते में जल्दी-जल्दी चलते हुए राकेश का पैर वहाँ पड़े एक पत्थर से टकराया।“उफ़! यह पत्थर भी न। इसे भी
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