कथा साहित्य

संस्मरण

बलड़ी (हरसूद) की वह भौतिक धरती नर्मदा मैया की गोद में विश्राम कर रही है

हमारी स्मृतियों की नदी जब बहती है, तो वह केवल शब्दों को नहीं, बल्कि एक पूरे कालखंड को जीवंत कर

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