बाल कविता

चींटी गुड़ खाती है

चींटी रोज मेरे घर आती है,
झोले में रखे गुड़ खाती है।

गुड़ खा-खाकर खूब हंसती हैं,
अपने बच्चों को भी लाती है।

एक दिन चींटी नही आयी,,
क्यों नहीं आज वह आयी।

पता करने मैं घर पर गया,
वहां किसी को नहीं पाया।

पड़ोसी से पूछा, कहाँ गयी है?
वह बोला- दवा लेने गयी है।

गुड़ खाने से हुआ यह हाल,
दवा खाने से सही है अब हाल।
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com