Author: *लीला तिवानी

कविता

बढ़ाओ अपने ही देश का मान!

घर-आंगन की शोभा होते,प्रेम-प्यार और स्नेह अपार,ऐसे घर-आंगन में खेलें, सुख,आनंद और खुशियां हजार। स्नेह-कपाट, सौहार्द झरोखे,होते घर-आंगन की शान,छोटों

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कविता

कविता- कवि कुछ ऐसा गान लिखो

कवि कुछ ऐसा गान लिखोकिअंतर्मन की चेतना जागृत हो,गूंज से दिगंत गुंजित हों,अन्तस् परिवर्तित हो,जीवन मोहक हो, रसवंत हो,अंतर्द्वंद्व-अंतर्कशाय विलुप्त

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कविता

वर्ण पिरामिड- गंगा

1.माँगंगेजय होभागीरथीपापनाशिनीहे भवतारिणीतेरा जल निर्मल।2.माँगंगापावनतेरा जलअमृत सममोक्षदायिनीभव से तार देजीवन संवार दे।3.माँगंगाकी धाराशीतल हैअमृत समनीर है इसकापावन पापनाशी। — लीला

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