Author: *लीला तिवानी

कविता

कविता- कवि कुछ ऐसा गान लिखो

कवि कुछ ऐसा गान लिखोकिअंतर्मन की चेतना जागृत हो,गूंज से दिगंत गुंजित हों,अन्तस् परिवर्तित हो,जीवन मोहक हो, रसवंत हो,अंतर्द्वंद्व-अंतर्कशाय विलुप्त

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कविता

वर्ण पिरामिड- गंगा

1.माँगंगेजय होभागीरथीपापनाशिनीहे भवतारिणीतेरा जल निर्मल।2.माँगंगापावनतेरा जलअमृत सममोक्षदायिनीभव से तार देजीवन संवार दे।3.माँगंगाकी धाराशीतल हैअमृत समनीर है इसकापावन पापनाशी। — लीला

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बाल कविता

बाल कविता – पिचकारी

मम्मी ला देना पिचकारी,रंगबिरंगी प्यारी-प्यारी,मैं भी होली खेलूंगा जम के,रंगों की कर लूंगा तैयारी। टोली बनाकर हम निकलेंगे,रंग लगाएंगे झूमेंगे,पिचकारी

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