बाल कविता – पिचकारी
मम्मी ला देना पिचकारी,रंगबिरंगी प्यारी-प्यारी,मैं भी होली खेलूंगा जम के,रंगों की कर लूंगा तैयारी। टोली बनाकर हम निकलेंगे,रंग लगाएंगे झूमेंगे,पिचकारी
Read Moreमम्मी ला देना पिचकारी,रंगबिरंगी प्यारी-प्यारी,मैं भी होली खेलूंगा जम के,रंगों की कर लूंगा तैयारी। टोली बनाकर हम निकलेंगे,रंग लगाएंगे झूमेंगे,पिचकारी
Read Moreमन में मेरे कहने को है बहुत कुछ,कैसे कहूं? कुछ समझ न पाऊं,मन में रखूं तो मन रूठ जाता है,बाहर
Read Moreनौतपा की अग्नि ज्वाला, धरती को तपाने आई है,प्रखर हुईं सूरज की किरणें, अम्बर ने आग बरसाई है। नौतपा की
Read Moreपहले हर बात दिल पर लेती थी,छोटी-सी बात में क्रोधित-सी होती थी,लोगों के शब्दों के अर्थ ढूंढती थी,फिर भी संतुष्ट
Read Moreनारी गौरव-संस्कृति की अमर धरोहर,शक्ति-स्नेह, समर्पण-स्वाभिमान से भरपूर,संस्कृति की शान, उससे ही जग में सम्मान,ममता की गंगा नारी, अभिमान से
Read Moreसबको हो समान अधिकार,भेदभाव का न हो अँधियार,ऊँच-नीच का रहे न पर्दा,सद्भाव का हो उजियार। रोटी, शिक्षा, सम्मान मिले,हर आँगन
Read Moreनई नौकरी से संभावना बहुत खुश थी. पहले वाली नौकरी में उसके समक्ष दो विकल्प थे- “बॉस के दंभ के
Read Moreआज उमेश एक डॉक्टर बनकर प्रसिद्धि पा रहा है, लेकिन यहाँ तक पहुंचा कैसे अक्सर वह याद करता!उमेश इंजीनियरिंग करना
Read More“मम्मा देखो-देखो, मैं क्या लाया हूँ.” स्कूल से आए सोनू ने बड़ी उमंग से अपने हाथ में मिट्टी के छोटे-से
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