कविता

नौतपा की अग्नि ज्वाला

नौतपा की अग्नि ज्वाला, धरती को तपाने आई है,
प्रखर हुईं सूरज की किरणें, अम्बर ने आग बरसाई है।

नौतपा की अग्नि ज्वाला, रोहिणी नक्षत्र-संग आई है,
तपती धरा जलता अंबर, व्याकुलता हर ओर छाई है।

नौ दिन तक लगातार, अग्नि बरसती सतत अंबर से,
यह अवधि कहलाती ‘नौतपा, रीति चली है युग-युग से।

आम पकें, जामुन महकें, बेल का शरबत मन को भाए,
पसीना छूटे, हिम्मत टूटे, मटके का ठंडा पानी सुख पहुँचाए।

दिन में आना-जाना मुश्किल, रात भी लाए गर्म हवाएँ,
लेकिन छत पर सोने का सुख, यादें पुरानी ले आएँ।

मई विदा होने को तत्पर, जून खड़ा द्वार पर,
नौ दिनों का कठिन तप अब, भारी है संसार पर।

भीषण गर्मी,तपती लू है, झुलस रही है सबकी काया,
किंतु इसी उत्ताप में देखो, सुख का संदेशा आया।

जितना अधिक तपेगा सूरज, उतनी वर्षा आएगी,
सूखी प्यासी इस धरती की, तृष्णा ये मिटाएगी।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

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