सद्भाव का हो उजियार
सबको हो समान अधिकार,
भेदभाव का न हो अँधियार,
ऊँच-नीच का रहे न पर्दा,
सद्भाव का हो उजियार।
रोटी, शिक्षा, सम्मान मिले,
हर आँगन में हँसी खिले,
अनय-अमर्ष मिटे मन से,
शोषण-छल का दुर्भाव हिले।
एक ही धरा है एक गगन,
रहें प्रेम से सभी मगन,
श्रमिक के श्रम का मान बढ़े,
बंधुत्व की सबको लगन।
मानवता की छाँव तले,
प्रेम-प्यार का भाव पले,
समता के स्वर्णिम पथ पर,
स्वप्निल-सा संसार चले।
— लीला तिवानी
