पंडवानी की अमर आवाज़
ऐसा हुनर कि इतिहास भी झुककर सलाम करें ,
डॉ तीजन बाई का हर स्वर, भारत का नाम करे।
जिनके स्वर में मिट्टी की सौंधी खुशबू बसती थी,
वे हर पंक्ति में संस्कृति की दीपशिखा रचती थी।
उनके तंबूरे की तान में था, साहस का उजियारा,
गायन शैली ने कर दिया लोककला को सितारा।
जो कला को इबादत समझ जीवनभर गाती रहीं,
वह अपने सुरों से पीढ़ियों को राह दिखाती रहीं।
रूढ़ियों की दीवारें तोड़ संघर्ष को ताकत बनाया,
जिसने पंडवानी को विश्व पटल पे मान दिलाया।
शरीर भले आज मौन हुआ, पर स्वर अमर रहेगा,
ओजस्वी वाणी का गौरव युगों तक सदा पूजेगा।
— संजय एम तराणेकर
