खून से लाल हुई वर्दी
वहाँ पे खून से लाल हुई जो वर्दी,वह केवल मात्र ‘कपड़ा’ नहीं थी।उसमें एक घर की भी उम्मीद थी,माई की
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Read Moreविकास की दौड़ में जब जंगल कट जाते हैं,नदियों के निर्मल दर्पण धुंधले पड़ जाते हैं।कुछ पल का लाभ भले
Read Moreचार दीवारों के भीतर, जब रिश्तों पर ताले लगते हैं,तब सबसे पहले बचपन की मुस्कानें रोती हैं।चार नहीं, साढ़े चार
Read Moreइंदौर | वरिष्ठ साहित्यकार सुजाता देशपांडे द्वारा संपादित एवं संकलित नवसृजित कहानी-संग्रह ‘कथा संचय’ का भव्य लोकार्पण समारोह रविवार को श्री
Read Moreलोहे से उसने दोस्ती की, नव इतिहास लिख लाई।भारत माँ की बेटी बन,स्वर्णिम गाथा पुनः दोहराई। कंधों पर देश का
Read More“कलम” पकड़ो, मशाल नहीं, ज्ञान चुनो, बवाल नहीं,तुमसे कल का सूरज है, तुम “राजनीतिक ढाल” नहीं।सत्ता हो या फिर विपक्ष,
Read Moreवे उधार लेकर “शान” दिखाएँ,फिर किस्तों में “आँसू” बहाएँ।सेल लगे तो दिल मचल जाएँ,बटुआ बोला—”मैं चला बाय!” क्रेडिट कार्ड की
Read Moreजो राह कभी कठिन लगी थी,आज वही “पहचान” बनी है।आई टी आई के हर प्रांगण में,बेटियों की नई उड़ान बनी
Read Moreलॉर्ड्स की धरा गूँज उठी हैं आज,हिंदुस्तान का ऊँचा हुआ है ताज।बेटियों ने ऐसा कमाल हैं दिखाया,विश्व को झुका शिखर
Read Moreकंधों का धर्म भी सुविधा के दर पे हार गया,पिता का दुःख “बाईक” का सफ़र बन गया।वो चार कंधों से
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