बाईक पर बंधी इंसानियत
कंधों का धर्म भी सुविधा के दर पे हार गया,पिता का दुःख “बाईक” का सफ़र बन गया।वो चार कंधों से
Read Moreकंधों का धर्म भी सुविधा के दर पे हार गया,पिता का दुःख “बाईक” का सफ़र बन गया।वो चार कंधों से
Read Moreहाथों में किताबें, आँखों में उजियारा,पर राह में फैला कीचड़ इतना सारा।नन्हें-नन्हें कदमों का यह कैसा सफ़र,हर मोड़ पे है
Read Moreआज पेट्रोल बोला, “भाई इथेनॉल,यूं आजा कर लें थोड़ा-सा धमाल।”सोचते इथेनॉल बोला, “ठीक है यार,अब तो मैं भी हूँ सरकार
Read Moreऐसा हुनर कि इतिहास भी झुककर सलाम करें ,डॉ तीजन बाई का हर स्वर, भारत का नाम करे।जिनके स्वर में
Read More1 जुलाई – डॉक्टर्स डे पर विशेष कविता सफेद कोट में “सेवा” का दीप,हरेक पीड़ा में रहते हैं समीप।दिन हो,
Read Moreसुबह की नरम धूप जब आँगन में उतरती है,चिड़ियों की चहचहाहट मन को छूकर गुजरती है।एक प्याली चाय के साथ
Read Moreविश्वास की डोरी टूट गई, सपनों की दुनिया छूट गई,जिस हाथ में मेहन्दी सजनी थी, मृत्यु छाया लूट गई। जिसने
Read Moreकम में खुश रहिए, खुशी कम नहीं होगी,मन की यह दौलत कभी कम नहीं होगी।महलों की चमक से जीवन नहीं
Read Moreवर्तमान में पिताओं में जो परिवर्तन परिलक्षित हुआ हैं। वह एक साहसिक और खुागवार पहलू है। साहसिक उस परिदृश्य को
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