नो बीमा, नो पेट्रोल
नो बीमा, नो पेट्रोल, सड़कों पे फिर कैसा रोल?नियम सबके लिए हैं, क्यों हों उनमें कोई होल?वाहन ले निकल पड़े
Read Moreनो बीमा, नो पेट्रोल, सड़कों पे फिर कैसा रोल?नियम सबके लिए हैं, क्यों हों उनमें कोई होल?वाहन ले निकल पड़े
Read Moreसमाज की पहचान उसकी ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों, बढ़ती अर्थव्यवस्था या आधुनिक तकनीक से नहीं होती। किसी भी सभ्यता का
Read Moreवहाँ पे खून से लाल हुई जो वर्दी,वह केवल मात्र ‘कपड़ा’ नहीं थी।उसमें एक घर की भी उम्मीद थी,माई की
Read Moreविकास की दौड़ में जब जंगल कट जाते हैं,नदियों के निर्मल दर्पण धुंधले पड़ जाते हैं।कुछ पल का लाभ भले
Read Moreचार दीवारों के भीतर, जब रिश्तों पर ताले लगते हैं,तब सबसे पहले बचपन की मुस्कानें रोती हैं।चार नहीं, साढ़े चार
Read Moreइंदौर | वरिष्ठ साहित्यकार सुजाता देशपांडे द्वारा संपादित एवं संकलित नवसृजित कहानी-संग्रह ‘कथा संचय’ का भव्य लोकार्पण समारोह रविवार को श्री
Read Moreलोहे से उसने दोस्ती की, नव इतिहास लिख लाई।भारत माँ की बेटी बन,स्वर्णिम गाथा पुनः दोहराई। कंधों पर देश का
Read More“कलम” पकड़ो, मशाल नहीं, ज्ञान चुनो, बवाल नहीं,तुमसे कल का सूरज है, तुम “राजनीतिक ढाल” नहीं।सत्ता हो या फिर विपक्ष,
Read Moreवे उधार लेकर “शान” दिखाएँ,फिर किस्तों में “आँसू” बहाएँ।सेल लगे तो दिल मचल जाएँ,बटुआ बोला—”मैं चला बाय!” क्रेडिट कार्ड की
Read Moreजो राह कभी कठिन लगी थी,आज वही “पहचान” बनी है।आई टी आई के हर प्रांगण में,बेटियों की नई उड़ान बनी
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