फादर्स डे (21 जून) पर विशेष – जीवन का आधार हैं : पिता
वर्तमान में पिताओं में जो परिवर्तन परिलक्षित हुआ हैं। वह एक साहसिक और खुागवार पहलू है। साहसिक उस परिदृश्य को
Read Moreवर्तमान में पिताओं में जो परिवर्तन परिलक्षित हुआ हैं। वह एक साहसिक और खुागवार पहलू है। साहसिक उस परिदृश्य को
Read Moreसमुद्री लहरों से लड़ते-लड़ते,जीवन जिनका यूं बीत गया।इस देश की साँसें चलती रहीं,उनका नाम कहाँ पे खो गया। वे सीमा
Read Moreअनजान ‘शहर’ की गलियों में,मैं खुद को ढूँढता फिर रहा हूँ।हरेक चेहरा लगता अपना-सा,फिर भी ‘तन्हा-तन्हा’ रहता हूँ। यहाँ पर
Read Moreगैस, पेट्रोल, डीज़ल के दाम,हर दिन लिखते नए पैगाम।जेब हो रहीं और भी हल्की,जीवन में छा रहीं हैं कड़की। पहियों
Read Moreसत्ता के शिखरों पर जो दीपक जलते थे,आज वही धुएँ में अपने निशान ढूँढ़ते हैं।भीड़ की तालियों से “गूँजते” थे
Read More(यादें शेष : सुमन कल्याणपुर)स्वर की सरिता में मधुर गीतों से घुलता ‘प्रेम’ निराला,कोमल तानों की पहचान, ‘सुमनजी’ का अद्भुत
Read Moreयूं ही जज़्बातों से बयां करते हैं,यहाँ कोई सबूत भी रखते नहीं।कुछ रिश्ते सिर्फ दिल में होते हैं,हर किसी को
Read More‘सत्ता’ बदली, बदले चेहरे, बदले शासन के व्यवहार,सवाल वही फिर उठा, किसका घर-क्या?अधिकार। कहतीं राबड़ी दृढ़ स्वर में, “नहीं छोड़ेंगे
Read Moreबस, ‘पंद्रह बरस’ की उम्र में ऐसा तूफ़ान उठा,हर गली-मोहल्ले में बस वैभव का नाम गूंजा।छोटे से कंधों पे सपनों
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