लघु कथा : बस्ता
सवा दो साल की बिटिया बैंककर्मी माँ की निगाह में स्कूल जाने योग्य हो गई थी। माँ ने उसे घर
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Read Moreबरखा की पड़त फुहारनाचो सखी गाओ मल्हार ।। सावन वर आयो,प्रकृति वधू सज गई ।आई बारात मेरे द्वार ।नाचो सखी
Read Moreआज भीमजदूर बनने कोविवश है कृषक वर्ग ।उनका सारा स्वाभिमानपूँजीपतियों कीजेबों में बंद हैबाहर निकलने कोआतुर है ।छटपटाहट है,कसक है
Read Moreकमली बैठे-बैठे जलते तवे को घूर रही थी । शराबी पति की हाड़ तोड़ती मार खाकर रोटी बनाने का किसका
Read Moreन्यायालय के कटघरों मेंखड़े होकरशपथ लेते हैं हम,गीता और कुरान की lकुछ की नजरों में ,ये हैं ईश्वरीय रचनाएँ lमहज
Read Moreकमली बैठे-बैठे जलते तवे को घूर रही थी । शराबी पति की हाड़ तोड़ती मार खाकर रोटी बनाने का किसका
Read Moreहिंडोला झूलते कान्हा जी,झूलों पर झूलें सखियाँ lमनभावन सावन आयासखियाँ है करतीं बतियाँ lकुछ सासुल की बतरावें ,कुछ साजन संग
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