कथाकार प्रेमचंद
आज भीमजदूर बनने कोविवश है कृषक वर्ग ।उनका सारा स्वाभिमानपूँजीपतियों कीजेबों में बंद हैबाहर निकलने कोआतुर है ।छटपटाहट है,कसक है
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Read Moreकमली बैठे-बैठे जलते तवे को घूर रही थी । शराबी पति की हाड़ तोड़ती मार खाकर रोटी बनाने का किसका
Read Moreन्यायालय के कटघरों मेंखड़े होकरशपथ लेते हैं हम,गीता और कुरान की lकुछ की नजरों में ,ये हैं ईश्वरीय रचनाएँ lमहज
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Read Moreहिंडोला झूलते कान्हा जी,झूलों पर झूलें सखियाँ lमनभावन सावन आयासखियाँ है करतीं बतियाँ lकुछ सासुल की बतरावें ,कुछ साजन संग
Read More“मैं तो बड़ा होकर विराट कोहली बनूँगा ।” रिंकू ने छक्का जमाते हुए कहा । ” मैं तो अंपायर बनूंगा
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