झील
जामुन का वह पेड़और वह झील का किनारापेड़ के नीचे बैठे गुरुजीऔर हम रटते थे पहाड़ा।प्रकृति की सुरम्य गोद मेंहमारी
Read Moreजीवन में कुछ घटनाएं अमिट होती हैं, जिन्हें हम अपने अंतः में समेटे रहते हैं। वार्तालाप के माध्यम से या
Read Moreअद्भुत नजारा था. बेटी अटैची सहित पिता के द्वार पर खड़ी थी. पिता बिना बताए, अचानक ससुराल से नाराज होकर
Read Moreडॉ.सुमित्रा जी मरीजों को रोज़ मरते देखती थीं. मेडिकल कॉलेज के एचडीओ यूनिट की इंचार्ज थीं वो. पर, आज वह
Read Moreहम हैं सुविधा- भोगी मानव,क्यों हम पेड़ लगाएं?मुफ्त में दो या चंद रूपये में,कहाँ उन्हें हम उगाएँ? नहीं है भूमि,
Read Moreमैं मूर्तिकार,अपनी कृतियों मेंभावों को संजोता हूंँ lमिट्टी और रंगों के संगम सेनवकृति को जन्म मैं देता हूंँ lएक दिन
Read Moreसामने वह जोएक लाल कोठी दिखती हैउसका रंगनिरंतर गहराता जा रहा है। क्योंकि,उसके अंदर का आदमीदूसरों का खून चूसदीवारों के
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