इनके झूठ के आगे दुनियां कुर्बान हो गई
राजनीति आजकल बदनाम हो गई
फ्री की आदत अब आम हो गई
दस बार मुकर जाते हैं सुबह से शाम तक
झूठ बोलना तो अब इनकी शान हो गई
बाणी पर नहीं रही इनके लगाम
कुछ भी बोल देना इनकी पहचान हो गई
अपने गिरेबान में झाँक कर देखते नहीं
सत्ता की कुर्सी इनकी जान हो गई
जीतते ही बन जाते हैं बादशाह
खुद बन गए स्याने जनता नादान हो गई
कहते हैं लोकतंत्र में जनता होती है सर्वोपरि
यहां तो जनता कमज़ोर और सत्ता बलवान हो गई
सत्ता के लिए कोई दीन ईमान नहीं इनका
कुर्सी तो इनके लिए भगवान हो गई
जनता को बना देते हैं हमेशा प्रश्न चिन्ह
खुद की बात आये तो पूर्ण विराम हो गई
कोई नहीं ऐसा जो सिद्धान्तों पर चले
सिद्धान्तों की बातें इनके लिए अपमान हो गई
कपड़े इनके सफेद हैं मन इनके काले
इनके झूठ के आगे दुनियां कुर्बान हो गई
— रवींद्र कुमार शर्मा
