लघुकथा : हर घर सेहत
छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव में मालती अपने बीमार बच्चे को गोद में लिए बैठी थी। पास में खड़ी
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Read Moreवो मेरे पिता के दोस्त थे, बहुत बड़े किसान और साहूकार। उनका नाम सुखदेव सिंह था। बहुत ही बड़ी हवेली।
Read Moreमैं लिखता हूँ। बहुत बड़ा लिखक्कड़ नहीं हूँ। आम जनता का लेखक हूँ। उनके बातें होती हैं। उनका दर्द, उनकी
Read Moreपति -पत्नी दोनों ही एक दूसरे के लिए चिंतित रहते थे । पता नहीं, पहले पहल आखिरी सांस कौन ले
Read Moreकॉलेज के वो दिन भी क्या ख़ूबसूरत होते हैं, जहाँ किताबों के पन्नों से ज़्यादा नज़रें हसीन चेहरों के मुताले
Read Moreबात उन दिनों की है जब मैं स्थानांतरित होकर इस घाटी में नया नया आया था और धारपुर के प्राइमरी
Read Moreदिल्ली की गलियां और वो पुर-असरार चेहरा पुरानी दिल्ली की वो तंग और तारीख़ (अंधेरी) गलियां, जहां हवाओं में आज
Read Moreकेरल के घने और हरे-भरे मन्नार के जंगलों के बीच से गुज़रती वह सड़क किसी भूल-भुलैया से कम न थी।
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