एहतियात से रिश्ते मर नहीं जाते
सावधानी की दीवारें जब बहुत ऊँची हो जाती हैं, तो उनके पीछे रिश्ते साँस लेना भूलने लगते हैं। अनिरुद्ध और
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Read More“कौन?” वह शायद हवा की सरसराहट थी, लेकिन उसे कुछ शब्द से सुनाई दे रहे थे। उसने आसपास देखा। दूर
Read Moreसुबह के दस बज रहे थे। नवनिर्वाचित सभापति अपने आफिस के अहाते में तैयार खड़े थे शायद उन्हें कहीं जाना
Read Moreरात की ख़ामोशी में जब पूरा शहर नींद की आग़ोश में था, तब आरव अपने कमरे की खिड़की के पास
Read Moreबचपन की यादें किसी सहेज कर रखी गई धरोहर जैसी होती हैं, जिन्हें छू भर लेने से समय की कई
Read Moreजिस दिन शहर के सबसे ईमानदार आदमी पर बेईमानी का आरोप लगा, उसी दिन पूरे शहर की ईमानदारी कटघरे में
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