लघु कथा – भावना
मनुष्य एक भावना प्रधान प्राणी है उसकी भावनाएं ही उसके सुख दुख की साथी होती हैं,स्थिति प्रतिकूल हो तो दुख
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Read Moreदूर-दूर तक जंगलों, पहाड़ों चट्टानो के बीच एक छोटा सा घर, जिसमें सिर्फ तीन लोगों का बसेरा था, लेकिन सपनों
Read Moreजंगल मे चिड़िया समुदाय की मीटिंग चल रही थी ।इस मीटिंग में कुछ ज्वलंत मुद्दे जैसे -पानी की समस्या, घोंसला
Read Moreयह कहानी किसी एक शख़्स की नहीं, बल्कि हर उस दिल की है जिसने मोहब्बत में सिर्फ़ पाना नहीं, बल्कि
Read Moreखेती -किसानी के साथ-साथ साहित्य सृजन का कार्य वह कड़ी मेहनत व दिल लगाकर करता था । बाहर कम ही
Read Moreवालिद साहब (पिताजी) के इंतक़ाल को अभी चंद ही महीने हुए थे कि घर की फज़ा (माहौल) बिल्कुल बदल गई।
Read Moreसुबह के क़रीबन नौ सवा नौ का ही समय होगा । दिल्ली मेट्रो हर रोज़ की तरह खचाखच भरी हुई
Read Moreपृथ्वी पर केवल एक पेड़ बचा था। उसे काँच के विशाल गुंबद में सुरक्षित रखा गया था। दुनिया भर के
Read Moreबड़े साहब का अचानक विभागीय दौरा आ गया, पूरे विभाग में भगदड़ मच गई। कोई फाइल लेकर इधर से उधर
Read Moreसर्दियों का आग़ाज़ हो चुका था। क़श्मीर की हसीन वादी पर सफ़ेद बर्फ़ की चादर बिछने को बेताब थी। ‘श्रीनगर’
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