संस्मरण – वो बारह साल की लड़की
वो मेरे पिता के दोस्त थे, बहुत बड़े किसान और साहूकार। उनका नाम सुखदेव सिंह था। बहुत ही बड़ी हवेली।
Read Moreवो मेरे पिता के दोस्त थे, बहुत बड़े किसान और साहूकार। उनका नाम सुखदेव सिंह था। बहुत ही बड़ी हवेली।
Read Moreयात्राएँ करना सम्भवतया मेरा स्वभाव ही बन गया था अथवा नियति, लेकिन परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव और देश की तत्कालीन परिस्थितियों
Read Moreजीवन के सत्ताइस सुहावने सावन एक साथ गुजारने के बाद हमारे श्रीमान् जी चलते बने। बस! सावन भी
Read Moreनदी किनारे रेत पे कैसी उतरायी रजनी,घिर आये बादरवा सजनी।पीला सूरज ढूंढ़े,ऊषा सजनी की लालीपत्ते नाचें संग हवा केदे-दे कर
Read Moreबचपन से सुनते-सुनते एक भ्रामक कथा मेरे मन में ऐसा स्थान बना बैठी थी कि मैं उसी को सत्य मानने
Read Moreकोरे पन्ने पर डायरी केकुछ लिख डालो नभले ही तुमएक एक शब्द बोलोमैं स्वयं वाक्य बना लूँगीतुमएक एक काँटा बिखेरोमैं
Read More‘‘दी, वो उस दिन मैंने आपको कुछ बताया था ना? वो….’’ उधर से आवाज़ बहुत दबी-दबी आ रही थी।‘‘क्या बताया
Read More