कविता
भुला भी नहीं सकते
बुला भी नहीं सकते।
कैसा दर्द दिया है तुमने
इस बिना जी नहीं सकते।
ये कैसी चदरिया दी है
ओढ़, बिछा नहीं सकते।
तुम मानो, चाहे ना मानो
हम दिल तोड़ नहीं सकते।
तुम उम्मीद हो प्यार की
भरोसा छोड़ नहीं सकते।
याद तो बहुत आती है
पर हम, रो नहीं सकते।
विश्वास सिर्फ़ शब्द नहीं
हम छल कर नहीं सकते।
ना तुम राही, ना मैं मंज़िल
प: तेरे बिन रह नहीं सकते।
— चन्द्र शेखर शर्मा चंद्रेश
