मन बहुत बौरा रहा है
ठंडे-ठंडे पानी में मुझेये क्या हो गया हैजैसे झील में कोईकमल खिल गया है। प्रीत में जैसे कोईमन-मीत मिल गया
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Read Moreसियासत अब सियासत नहीं रहीरोम रोम में उनके तिजारत भरी रही। वे अवाम को देखते हैं हिकारत सेवोट लेकर, कुर्सी
Read Moreमधुमयि तुम्हारी हैं स्मृतियांऔर प्रातः की सूर्य-सी रश्मियां। ये है प्रेम का संधि काल औरकहलाता है वसन्त काल। प्रेम और
Read Moreजिस घर में जन्मती हैं बेटियांउस घर में आती हैं समृद्धियां।गया समय, जब पुत्र जन्म परघर-घर में बजती थीं थालियां।अब
Read Moreनहीं, अब मन नहीं करताना पढ़ने, ना लिखने का।कुछ विरक्ति होने लगी हैमन भी अनमन रहता है।शंकाओं से रहता है
Read Moreविवाह तेरा व मेरा हैइसी सोच को धोना हैविवाह दो तनों का नहींये कुल कुटुंब में होना हैये नए दौर
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