मोहभंग
लाख आश्वासनों के बाद भीजब गरीब के कनस्तर तकआटा नमक तेल न पहुंचते तोउसका सत्ता से मोह भंग होना लाजमी
Read Moreदिसंबर का महीना घोर सर्दियों के दिन।मैं कमरे में बैठा हीटर सेंक रहा था और टीवी पर समाचार देख रहा
Read More“नयनों के तले कल्पनाओं का विशाल आकाश है जिसमें मन रूपी पाखी निरंतर विचरण करता रहता है और पल प्रतिपल
Read Moreसुरजीत एक हफ्ते की छुट्टी काटकर वापस ड्यूटी पर जा रहा था। सुबह आठ बजे घर से चला था और
Read Moreपहाड़ों में जीने के लिए पहाड़ होना पड़ता है। जिस तरह पहाड़ धूप- छांव को सहते हुए हमेशा अपनी पीठ
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