कहानी – भटकी हुई आत्मा
बात उन दिनों की है जब मैं स्थानांतरित होकर इस घाटी में नया नया आया था और धारपुर के प्राइमरी
Read Moreबात उन दिनों की है जब मैं स्थानांतरित होकर इस घाटी में नया नया आया था और धारपुर के प्राइमरी
Read Moreअपना सामां बांध बटोही सांझ हुई चल घर चलते हैं।कल आया तो कल देखेंगे सांझ हुई चल घर चलते हैं।।
Read Moreफूल खिला खिलकर झर गयाइसका मतलब यह नहीं किपौधा मर गया। पौधे !तू फूल गिरने परअफसोस मत करकौन किसके साथ
Read Moreदिसंबर का महीना घोर सर्दियों के दिन।मैं कमरे में बैठा हीटर सेंक रहा था और टीवी पर समाचार देख रहा
Read More“नयनों के तले कल्पनाओं का विशाल आकाश है जिसमें मन रूपी पाखी निरंतर विचरण करता रहता है और पल प्रतिपल
Read Moreसुरजीत एक हफ्ते की छुट्टी काटकर वापस ड्यूटी पर जा रहा था। सुबह आठ बजे घर से चला था और
Read Moreपहाड़ों में जीने के लिए पहाड़ होना पड़ता है। जिस तरह पहाड़ धूप- छांव को सहते हुए हमेशा अपनी पीठ
Read More