जीवन-यथार्थ के विविध रंगों का प्रिज़्म कहानी संग्रह-” नियति का जंगल”
“नयनों के तले कल्पनाओं का विशाल आकाश है जिसमें मन रूपी पाखी निरंतर विचरण करता रहता है और पल प्रतिपल
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Read Moreसुरजीत एक हफ्ते की छुट्टी काटकर वापस ड्यूटी पर जा रहा था। सुबह आठ बजे घर से चला था और
Read Moreपहाड़ों में जीने के लिए पहाड़ होना पड़ता है। जिस तरह पहाड़ धूप- छांव को सहते हुए हमेशा अपनी पीठ
Read Moreचुनावी दौर था ।धन्नु को नेताजी के फोन आते । नेताजी धन्नु को धनपत कहकर संबोधित करते उसके परिवार का
Read Moreजुलाई का महीना था दिन के लगभग बारह बजे होंगे। आज मौसम साफ था इसलिए बड़ी तेज धूप थी। वरना
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