लघुकथा – यादों का बैंक
शहर में एक नया बैंक खुला—“यादों का बैंक”। यहाँ लोग पैसे नहीं, अपनी यादें जमा करते थे। खुशियों की यादों
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Read Moreमेरी डायरी के ये धूल-धूसरित, उदास पन्ने और उनकी हर पंक्ति में सांस लेती तुम्हारी स्मृतियां…आज फिर मैंने इन्हें पलटा,
Read Moreकवि सम्मेलन की नामचीन हस्तियांश्री शैल चतुर्वेदी औरश्री बशीर बद्रशैल जी का आग्रहवाणी वंदना के बाद मुझे पढ़ाएंसंचालक डॉक्टर सतीश
Read Moreरीना को लोग अक्सर “गलत फैसले लेने वाली औरत” कहते थे। लेकिन कोई उसकी कहानी पूरी सुनना नहीं चाहता था।
Read Moreमैं अपने बरामदे में बैठा पहाड़ों की खूबसूरती को देख रहा था । इस बार कई सालों के बाद मैं
Read Moreशाम ढल रही थी, और रेलवे स्टेशन के पुराने पीपल के पेड़ पर परिंदों का शोर धीरे-धीरे थम रहा था।
Read Moreचंबल की सुलगती फ़िज़ाओं में सिर्फ़ बारूद की तीखी गंध और ख़ून के कतरे ही नहीं तैरते थे, बल्कि एक
Read Moreयह उस दौर की बात है जब इश्क़ ज़मानों और सरहदों का मोहताज नहीं हुआ करता था, बल्कि दो दिलों
Read More.. और अपने हिस्से की सारी तकनीकी पढ़ाई समाप्त कर लेने के बाद भी जब कोई प्लेटफ़ॉर्म नहीं मिला तब
Read Moreपिछले कुछ दिनों से आशा फोन पर बहुत कम ही बात करती थी। कारण स्पष्ट था, ए आई के आने
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