दीवार पर टंगी तस्वीरें
कमरे की दीवार पर टंगी दो तस्वीरें,एक माँ की और दूसरी अब्बा की। जिन पर धूल जम चुकी थी, मगर
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Read Moreरात की ख़ामोशी में अनमोल अपनी खिड़की के पास बैठा ज़िंदगी से सवाल कर रहा था। आँखों में अधूरे ख़्वाब,
Read Moreकेतन और निखिल की दोस्ती बचपन से थी। दोनों एक ही विद्यालय में पढ़े थे, एक ही मैदान में खेलते
Read Moreशाम का धुंधलका था, शहर के किसी मसरूफ़ तरीन चौराहे पर ट्रैफ़िक का शोर और हुजूम अपनी इंतहा पर था।
Read Moreइलाका पहाड़ी था,कोहरे और धुंध की चादर ओढ़े ऊँचे-ऊँचे पाकीज़ा दरख़्त, आसमान से बातें करती चोटियाँ, और घुमावदार रास्तों पर
Read Moreजून की तपती दोपहर हो या जुलाई की उमस भरी शाम, सुनील का पूरा दिन सीढ़ी पर ही बीतता था।
Read Moreछोटे-से शिवम के लिए उसके पापा बहुत-से खिलौने ले आए. उनमें एक खिलौना था- बापू के तीन बंदर.एक बंदर की
Read Moreआज वह अर्थी पर लेटी थी। दोनों हथेलियाँ खाली थीं। छोटी ननद ने जेठानी से कहा, “भाभी, सुहागन को दोनों
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