एक गिलास पानी की कीमत
कभी-कभी इंसानियत का एक छोटा-सा काम जीवन की सबसे बड़ी दौलत बन जाता है। एक दिन एक नन्ही-सी बच्ची प्यास
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Read More“नगर निगम का बुलडोज़र ठीक आठ बजे पहुँचा। भीड़ तमाशा देखने खड़ी थी, पर एक बूढ़ा आदमी अपनी जर्जर किताबों
Read Moreबारिश की शाम थी। शहर के एक छोटे से कैफ़े में हर रोज़ ठीक पाँच बजे एक बुज़ुर्ग आते थे।वो
Read Moreलगभग तीन बज रहे थे। पूरा आकाश काली पुतलियो से घिरा हुआ था। सभी विद्यालय की छुट्टी होने का बेसब्री
Read Moreरमेश के ऑफिस से आने के तुरंत बाद ही सुधा उसपर चिल्ला उठी ,अरे तुमने भी कैसे-कैसे कंगाल लोगों को
Read Moreविदेश में रहते हुए उसे कई वर्ष बीत गए थे। अच्छी नौकरी, अपना घर, पत्नी और बच्चों से भरा संसार—जीवन
Read Moreजब-जब घर की याद आती वह विह्वल हो वृद्धाश्रम से दूर घूमने निकल जाते थे । आज भी सुबह-सुबह घूमते-घूमते
Read Moreविद्यालय का वार्षिक उत्सव समाप्त हुआ और के.जी. में पढ़ने वाली नन्ही मिनी भागकर मीनाक्षी के गले आ लगी। “मम्मी!
Read Moreप्रिय अमन,मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा,तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने
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