नुक्ताचीनी
(1)मुरलीधर रिक्शा से उतरे। मालती को भी उतरने का संकेत किया।“यह फलों की टोकरी कहाँ रख दूँ बाबू जी!” रिक्शावाले
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Read Moreप्रेम का भाव लिए प्रेमी-प्रेमिका अपने मन की बाते कर रहे थे। वे दोनों चाहते थे कि उनका प्रेम अमर
Read Moreशाम की छाया गहरी हो रही थी। महाविद्यालय की उस पुरानी और ऐतिहासिक पुस्तकालय की खिड़की से बाहर का दृश्य
Read Moreशिक्षकीय जीवन में प्रतिदिन न जाने कितने चेहरे सामने आते हैं। कुछ चेहरे समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं,
Read Moreबहुत साल हो गया गुरु जी को हमने याद नहीं किया। और गुरु जी को भी हम कहां याद रहे
Read Moreक्लर्क प्रताप नारायण जाटव की मेज़ पर फ़ाइलें रुकती थीं — महीनों, सालों। पर वे रुकती तभी थीं जब लिफ़ाफ़ा
Read Moreगाँव निवाई में हर अमावस की रात एक अनजाना-सा डर उतर आता था. कच्ची पगडंडियाँ, घास-फूस के घर और दूर
Read Moreक्या खूबसूरत विषय दिया है- ‘ वो भी क्या दिन थे- बिजली गुल और छत पर मेला’. सचमुच वो दिन
Read Moreरहमान और रेहाना दोनों खुश थे। जैसा एक-दूसरे को चाहते थे। वैसे ही मिले थे। हंसमुख स्वभाव के थे। दोनों
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