वह लड़का
वह कोई अमीर घर का बेटा नहीं था। न ही उसके पास बड़ी-बड़ी ख्वाहिशें थीं। बस कुछ छोटे-छोटे सपने थे-
Read Moreगांव के छोर पर बना वह प्राथमिक विद्यालय बरसों से मास्टर केशवराम की पहचान था। पूरे इलाके में लोग उन्हें
Read Moreअम्मा को, जब से हमने होश संभाला था, बस एक ही बात बार-बार दोहराते देखा था—“अच्छी चीज़ को रोज़ इस्तेमाल
Read Moreवैसे तो बेटियों को हर पल मायके की याद आती है, लेकिन सावन के आते ही सभी बेटियों-बहिनों को मायके
Read Moreहरियाणा के एक छोटे-से कोने में बसा था छतरपुर गाँव। गाँव छोटा था, लेकिन उसके रिश्तों की दुनिया बहुत बड़ी
Read Moreसूरज के मोबाईल पर मैसेज आया कि देश के साहित्यकारों की रचनाओं का एक वृहद ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है |
Read Moreसम्मान समारोह में जब मंच से उसका नाम पुकारा गया, तो उसने तालियों की ओर नहीं, आख़िरी पंक्ति में बैठी
Read Moreसमय चक्र घूमता रहा। मालती अपने परिवार के सुख-दुःख में ऐसे उलझी रही कि मायके जाकर अपने माता पिता के
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