परवरिश
काफी देर से बच्चों को पुकार रहे थे, किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा था । क्यों
Read Moreजब-जब घर की याद आती वह विह्वल हो वृद्धाश्रम से दूर घूमने निकल जाते थे । आज भी सुबह-सुबह घूमते-घूमते
Read Moreपिछले कुछ दिनों से आशा फोन पर बहुत कम ही बात करती थी। कारण स्पष्ट था, ए आई के आने
Read Moreचिंतन से चित्त हो अशांतमन रहने लगे क्लांतएकाकीपन रास आने लगेरातें लंबी हो डराने लगेहर आहट पर मन घबराने लगेकुंठा
Read Moreजेब में चंद रूपये और जरूरतें सुरसा की तरह मुंह बाये उसे कसौटी पर कसने को तैयार थी । राजन
Read More“पापा इस बार मैं घर नहीं आ पाऊँगा गर्मी की छुट्टीयों में,क्योंकि अपने लिए एक फ्लैट लेने की सोच रहा
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