Author: *आरती राय

कविता

कविता

तेरे खेल निरालेआनंद उत्साह और अवसादसब कुछ तेरे हवालेमन मर्जी चलती कहांअदृश्य शक्तिविचरण करते यहां-वहांतुम हमें संभालतेअहंकार को ग्रास बनातेस्वाभिमान

Read More