जग-जाहिर
“आ गई मैडम जी लटके-झटके दिखाकर सबको अपने वश में करने वाली । बला की खुबसूरत है तभी तो बॉस
Read Moreजब-जब घर की याद आती वह विह्वल हो वृद्धाश्रम से दूर घूमने निकल जाते थे । आज भी सुबह-सुबह घूमते-घूमते
Read Moreपिछले कुछ दिनों से आशा फोन पर बहुत कम ही बात करती थी। कारण स्पष्ट था, ए आई के आने
Read Moreचिंतन से चित्त हो अशांतमन रहने लगे क्लांतएकाकीपन रास आने लगेरातें लंबी हो डराने लगेहर आहट पर मन घबराने लगेकुंठा
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