कविता

चाहतें

ये चाहतों के सिलसिले
कभी शिकवे कभी गिले
धूँध से हैं जा कर मिले
छंटते नहीं कभी भी शाम ढ़ले ।

अपेक्षाओं की कोख से पैदा होते
उम्मीदों के दीप अखंड ही रहते
छोटे-छोटे सपने पूरे होते रहते
फिर भी निराशाओं के बादल घेरे रहते।

स्वस्थ तन में बिमारियों का बसेरा
क्रोध-लोभ और दुश्चिंताओं का घेरा
मानव मन है एक घुड़सवार
संतोषधन त्याग रहे सदा बीमार ।

कर्म की राह पर चलते जाना
अपने हिस्से का फर्ज निभाना
संयमित जीवन सद्व्यवहार
वैसे मानव नहीं कभी लाचार ।

— आरती रॉय

*आरती राय

शैक्षणिक योग्यता--गृहणी जन्मतिथि - 11दिसंबर लेखन की विधाएँ - लघुकथा, कहानियाँ ,कवितायें प्रकाशित पुस्तकें - लघुत्तम महत्तम...लघुकथा संकलन . प्रकाशित दर्पण कथा संग्रह पुरस्कार/सम्मान - आकाशवाणी दरभंगा से कहानी का प्रसारण डाक का सम्पूर्ण पता - आरती राय कृष्णा पूरी .बरहेता रोड . लहेरियासराय जेल के पास जिला ...दरभंगा बिहार . Mo-9430350863 . ईमेल - arti.roy1112@gmail.com