कविता

सबकी सुनी

कहना और सुनना
मानों एक नदी के दो किनारे
माँ सिखाई बच्चों को सुनने की आदत होनी चाहिए।
सयानी हुई सखियों ने कहा
बोलने से बेहतर है सुनना
दाम्पत्य डोर से बंधे
सबने कहा, परिवेश बदला
सुन कर समझा करो ।
परिवार बढ़ने लगा
किसी ने कहा गुस्सा आक्रोश
दीमक है रिश्तों का,दूरी जरूरी
बच्चे बड़े हो रहे, उनकी सोच
से तालमेल बिठाओ, कहासुनी
से रिश्तों में कटूता फैलेगी ।
वक्त के साथ सबों ने दूरी बढा ली
कहने और सुनने वाला एक ही बचा अंतर्मन ।
अंतर्मुखी हो बातें करना
आदत बन रही है
अपनी कहने की उम्र गुजर गई ।
सुन कर अनसुनी करना
निर्विकार भाव में जीना ही सही
स्त्री और पुरूष में फर्क यही।

— आरती रॉय

*आरती राय

शैक्षणिक योग्यता--गृहणी जन्मतिथि - 11दिसंबर लेखन की विधाएँ - लघुकथा, कहानियाँ ,कवितायें प्रकाशित पुस्तकें - लघुत्तम महत्तम...लघुकथा संकलन . प्रकाशित दर्पण कथा संग्रह पुरस्कार/सम्मान - आकाशवाणी दरभंगा से कहानी का प्रसारण डाक का सम्पूर्ण पता - आरती राय कृष्णा पूरी .बरहेता रोड . लहेरियासराय जेल के पास जिला ...दरभंगा बिहार . Mo-9430350863 . ईमेल - arti.roy1112@gmail.com