लघुकथा – गृह प्रवेश
“पापा इस बार मैं घर नहीं आ पाऊँगा गर्मी की छुट्टीयों में,क्योंकि अपने लिए एक फ्लैट लेने की सोच रहा
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Read Moreसमय कितना बदल रहा है ! पहले माता पिता शादियां तय करते थे फिर संतान के मोह में लिव-इन रिलेशनशिप
Read Moreनित्य नवीन सपने और उन्हें पूरा करने का जुनून ! जीवन से धीरे-धीरे सब कुछ छीन लिया । अहसास होने
Read Moreभावनाएं आवारा बादल की तरहउमड़-घुमड़ कर शोर मचायेकभी ठंढ़ी फुहार बन हलचल मचायेकभी गर्जन कर हमें डरायेऐसी सोच पर हंसी
Read Moreअतृप्त धरा अति अकुलाईवर्षा रूठ नभ में खिसियाईफूलों की डाली मुरझाईपौधों ने भी शोक मनाई । क्यों रूठी हो धरा
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