Author: डॉ. शैलेश शुक्ला

विज्ञान

भारत में कृत्रिम मेधा के विकास में व्यावहारिक चुनौतियाँ

कृत्रिम मेधा, यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), आज दुनिया की सबसे तेज़ चलती तकनीकी दौड़ बन गई है। चैटबॉट से लेकर

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शिक्षा एवं व्यवसाय

मातृभाषा माध्यम में उच्च शिक्षा विकास को दे सकती है रफ्तार

भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, वह चिंतन की धुरी है। जिस भाषा में मनुष्य सपने देखता है, तर्क

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शिक्षा एवं व्यवसाय

क्या एआई साक्षरता के लिए भारत पर्याप्त कदम उठा रहा है

एक समय था जब अपना नाम लिख लेना ही साक्षरता मानी जाती थी। फिर कंप्यूटर चलाना सीखना साक्षरता बन गया।

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विज्ञान

कट्टर प्रतियोगिता के बीच चीन और अमेरिका के बीच एआई सहयोग की संभावना

इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में दुनिया जिस सबसे बड़े बदलाव की गवाह बन रही है, वह केवल आर्थिक या

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भाषा-साहित्य

देवेन्द्र माँझी के सृजन संसार में सामाजिक चेतना

समकालीन हिंदी और उर्दू साहित्य के परिदृश्य में देवेन्द्र माँझी एक अत्यंत संवेदनशील, यथार्थवादी और लोक-चेतना से संपृक्त रचनाकार हैं।

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विज्ञान

संस्थानों की आचार-संहिताओं में एआई न होना दुनिया के सामने खड़ा एक गंभीर नैतिक संकट

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब भविष्य की कोई दूर की तकनीक नहीं रह गई है। यह कार्यालयों, उद्योगों, विश्वविद्यालयों,

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