लघुकथा

वृद्धावस्था 

पति -पत्नी दोनों ही एक दूसरे के लिए चिंतित रहते थे । पता नहीं, पहले पहल आखिरी सांस कौन ले और फिर आगे क्या होगा…! मृत्यु का अटल सत्य पति को भी मालूम था और पत्नी को भी । दोनों का मोह एक दूसरे के प्रति गहरा था ।

 पति चाहता था की पत्नी बैंक, डाकघर, एवं एल आई सी, अन्य कार्यालयों के बारे में जाने, इंटरनेट सीखे ताकि कागजी कार्य सहजता से कर पाए, ऑनलाइन कार्य भी स्वयं ही कर पाये । और पत्नी चाहती थी कि पति देव स्वयं घर के कार्य सीख लें, जैसे – खाना बनाना, कपड़े धोना, साफ-सफाई आदि ।

बहुत सोचने के उपरांत एक दिन एक दूसरे ने उक्त समस्या पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया । पति पत्नी को साथ लेकर कार्यालयों के फाॅर्म आदि भरना सिखाया, स्मार्टफोन से इंटरनेट चलाना सिखाया और भी जरूरी कार्य सिखाये । वहीं पत्नी ने भी बीमारी का बहाना बनाकर पति महोदय से खाना बनाना व घर के अन्य कार्यों को करने की कला भी सिखा दी । अब वे दोनों निश्चिंत थे । 

वृद्धावस्था का दर्द उन्हें कमजोर नहीं कर रहा था । मन हल्का हो चुका था । तृप्तभाव से पति पत्नी जीवन का आनंद लेने लगे ।

— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

नाम - मुकेश कुमार ऋषि वर्मा एम.ए., आई.डी.जी. बाॅम्बे सहित अन्य 5 प्रमाणपत्रीय कोर्स पत्रकारिता- आर्यावर्त केसरी, एकलव्य मानव संदेश सदस्य- मीडिया फोरम आॅफ इंडिया सहित 4 अन्य सामाजिक संगठनों में सदस्य अभिनय- कई क्षेत्रीय फिल्मों व अलबमों में प्रकाशन- दो लघु काव्य पुस्तिकायें व देशभर में हजारों रचनायें प्रकाशित मुख्य आजीविका- कृषि, मजदूरी, कम्यूनिकेशन शाॅप पता- गाँव रिहावली, फतेहाबाद, आगरा-283111