Author: *डॉ. अनीता पंडा

कविता

मैं सत्य हूँ

झाड़ मिथ्याचारमैं निर्भीक खड़ा हूँ,पैर जमाये खड़ा हूँअमर हूँ, मैं ब्रह्म हूँपल-पल परिवर्तन बीचमैं अपरिवर्तनशील हूँअंतः बाह्य एक हूँसह आक्रमणता

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