सुगंध अहसास की
हर वर्ष की भांति इस बार भी माहेश्वरी जी अनाथ कन्याओं के कन्यादान का पुनीत कार्य कर रही थीं। विवाह
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Read Moreरास्ते में जल्दी-जल्दी चलते हुए राकेश का पैर वहाँ पड़े एक पत्थर से टकराया।“उफ़! यह पत्थर भी न। इसे भी
Read Moreमाँ सुनाती थी मुझको लोरीमीठी जैसे शहद की गोली।जैसे चंदा की शीतल छायानिंदिया रानी फैलाये माया। अपनी बाहों में भर
Read More“उफ्! ये चीटियाँ गर्मी आते ही बहुत परेशान करती हैं। रसोईघर तो है ही इनकी जागीर। अब किताबों की अलमारी
Read Moreगहरी काली रात में अब्दुल घर की चौखट पर दिया लिए खड़ा किसी का इंतजार कर रहा था। ठंडी हवा
Read Moreताकतवर बनने की महत्वाकांक्षा में एक राष्ट्राध्यक्ष परमाणु परीक्षण करता जा रहा हैं। वह सबसे शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष है। उसे देख
Read Moreझाड़ मिथ्याचारमैं निर्भीक खड़ा हूँ,पैर जमाये खड़ा हूँअमर हूँ, मैं ब्रह्म हूँपल-पल परिवर्तन बीचमैं अपरिवर्तनशील हूँअंतः बाह्य एक हूँसह आक्रमणता
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