देह चली गई, स्वर रह गया : लता होने का अर्थ यही है
कुछ आवाज़ें सुनी नहीं जातीं—वे भीतर कहीं घटित होती हैं। वे कानों की देहरी लाँघकर स्मृतियों में उतरती हैं और
Read Moreकुछ आवाज़ें सुनी नहीं जातीं—वे भीतर कहीं घटित होती हैं। वे कानों की देहरी लाँघकर स्मृतियों में उतरती हैं और
Read Moreकुछ रिश्ते टूटते नहीं, बस उनके बीच अदृश्य दीवार खड़ी हो जाती है। उसकी ईंटें अक्सर दोनों तरफ के लोग
Read Moreइंदौर की झुग्गी बस्ती में असामान्य तेज़ बारिश हो रही थी। जलवायु परिवर्तन ने मौसम चक्र बदल दिया था। पैंतालीस
Read Moreकिसी घर की आर्थिक ताकत अलमारी में रखे नोटों से नहीं, उस हाथ से तय होती है जो अगला रुपया
Read Moreहर बड़ी यात्रा शोर से नहीं, छोटे कदमों से शुरू होती है। 17 सितम्बर 1950 को वडनगर में जन्मे नरेन्द्र
Read Moreआज मनुष्य घर, वस्तुओं और परिवेश को साफ रखने में जितना सजग है, उतना ही अपने भीतर की अशांति से
Read Moreहिंदी से हमारा रिश्ता भी बड़ा अजीब है—साल में एक दिन प्रेम उमड़ता है और बाकी दिन सुविधा जीत जाती
Read Moreदस सितंबर केवल आत्महत्या निवारण दिवस नहीं, हमारी संवेदना की परीक्षा है। हर वर्ष हम संकल्प लेते हैं, संदेश दोहराते
Read Moreबचपन कभी चीजों का हिसाब नहीं रखता था; अब उसे सिखाया जा रहा है कि उसकी पहचान भी चीजों से
Read Moreवर्तमान समय की सबसे भयावह महामारी अस्पतालों में नहीं, घरों के भीतर पल रही है। इसका न कोई परीक्षण है,
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