Author: कृति आरके जैन

पर्यावरण

प्रकृति की रक्षा को धर्म मानने वाले समुदायों का विश्व आदिवासी दिवस

मानव सभ्यता की प्रथम चेतना से आधुनिक युग तक, कुछ समुदायों ने प्रकृति पर अधिकार नहीं, बल्कि उसके साथ आत्मीय

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भाषा-साहित्य

रवींद्रनाथ टैगोर: विचारों का वह वृक्ष, जिसकी छाया आज भी शीतल है

सभ्यताएँ अपनी सबसे बड़ी पूँजी स्मारकों में नहीं, उन विचारों में बचाकर रखती हैं जो पीढ़ियों का हाथ थामे रहते

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अन्य लेख

ग्लासगो की सीमित राह पर भारत ने असीमित संभावनाएँ खोल दीं

राष्ट्रों की असली ऊंचाई उनके हिस्से आए अवसरों से नहीं, छिन गए अवसरों के बाद के प्रदर्शन से मापी जाती

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राजनीति

एक राष्ट्र, एक तिरंगा, लेकिन हर युग में स्वतंत्रता की अलग परीक्षा

तिरंगे की छांव में खड़े होकर अब केवल बीते संघर्षों को याद करना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह जानना भी जरूरी

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इतिहास

राष्ट्र का वह ऋषि, जिसने विचारों को तिरंगे में बदल दिया

राष्ट्र केवल सीमाओं, शासन या संविधान से नहीं बनते; वे उन प्रतीकों से गढ़े जाते हैं जिनमें करोड़ों लोगों की साझा स्मृतियाँ, आकांक्षाएँ

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भाषा-साहित्य

प्रेमचंद : एक लेखक नहीं, संघर्षरत भारत की जीवित तस्वीर

शब्दों से समाज की आत्मा लिखने वाले साहित्यकार विरले होते हैं। 31 जुलाई केवल जन्मतिथि नहीं, उस युगदृष्टा का स्मरण

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मशीनों के युग में मनुष्य को मनुष्य बनाने वाली शक्ति : गुरु

जब संसार प्रकाश के साधनों से जगमगा रहा हो, फिर भी मनुष्य का अंतर्मन अज्ञान, भ्रम और बेचैनी के अंधकार

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