लघुकथा – बंद घड़ी
पुराने मकान की सफ़ाई करते समय बेटे को पिता की वर्षों पुरानी बंद घड़ी मिली। उसने हँसते हुए कहा, “इसे
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Read Moreराष्ट्र की शक्ति केवल मतगणना से नहीं, करगणना से भी मापी जाती है। मतपत्र नागरिक की राजनीतिक चेतना का प्रतीक
Read Moreजब संसार प्रकाश के साधनों से जगमगा रहा हो, फिर भी मनुष्य का अंतर्मन अज्ञान, भ्रम और बेचैनी के अंधकार
Read Moreकभी-कभी इतिहास राजाओं के मुकुट से नहीं, एक साधारण युवक की भींची हुई मुट्ठी से बदलता है। साम्राज्य हमेशा तोपों
Read Moreघर सबसे पहले दीवारों से नहीं, किसी की प्रतीक्षा से बनता है। कभी शाम ढलते ही दरवाज़े पर हर आहट
Read Moreवृद्धाश्रम में रहने वाले एक बुज़ुर्ग रोज़ सुबह सबसे पहले रजिस्टर खोलते और अपने काँपते हाथों से अपने नाम के
Read Moreभारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह नहीं कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देर से
Read Moreसमय की धूल राजमहलों को ढँक सकती है, पर शब्दों की ज्योति कभी नहीं बुझती। किसी समाज की सबसे अमूल्य निधि
Read Moreहर जन्म नई संभावना लेकर आता है, लेकिन हर संभावना उपलब्धि में नहीं बदलती। यही प्रश्न विश्व जनसंख्या दिवस हमारे
Read Moreहर बीमारी आने से पहले दस्तक देती है, लेकिन सबसे अधिक अनसुनी वही दस्तक होती है, जो एक महिला का
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