सच के साथ चलो,भले खिलाफ़ संसार हो
सही राह चुनो,चाहे राह में काँटे हज़ार हों,
सच के साथ चलो,भले खिलाफ़ संसार हों,
झूठ की चमक पल दो पल आँखों को भरमाती है,
सच्चाई की लौ मगर अँधेरों में भी राह दिखाती है।
सच्चे हो तो हर बात का प्रमाण देना ज़रूरी नहीं,
निर्मल चरित्र को बार-बार बयान देना ज़रूरी नहीं,
वक़्त स्वयं खोल देता है चेहरों के सारे राज़,
सच की ख़ामोशी भी रखती है अपनी बुलंद आवाज़।
सच की नाव कभी लहरों से घबराया नहीं करती,
आँधियों के आगे अपना सिर झुकाया नहीं करती,
हिलती है,डगमगाती है,मगर किनारा पा लेती है,
ईमान की पतवार हो तो हर लहर हार जाती है।
झूठ महलों-सा ऊँचा हो,फिर भी ढह जाता है,
सच तिनके-सा दिखे,फिर भी अमर रह जाता है,
समय की अदालत में कोई छल टिक नहीं पाता,
जिसका ज़मीर ज़िंदा हो,वह कभी नहीं हारता।
इसलिए हर कदम पर सच्चाई का साथ निभाते चलो,
गिरो अगर कभी तो फिर उसी राह पर आते चलो,
हे किशन सच की नाव हिलेगी मगर कभी डूबेगी नहीं,
जो सच में जीता है,वह किसी को डुबोएगा भी नहीं।
— किशन सनमुखदास भावनानी
