मुक्तक/दोहा

झूठ लगाए जोर

झूठ सजाकर सत्य-सा, करते खूब प्रचार।
क्लिकों फँसी इस भीड़ में, बिकता है व्यापार।।

चेहरा बदला, बोल भी, बदला पूरा हाल।
डीपफेक के दौर में, सच होना बेहाल।।

झूठी खबरें दौड़तीं, सच चलता लाचार।
जिसकी गति सबसे अधिक, उसका ही प्रचार।।

कट-पेस्टों की आँधियाँ, खूब मचाए शोर।
तथ्य खड़े चुपचाप हैं, झूठ लगाए जोर।।

जो दिखा रहा वीडियो, देता नहीं प्रमाण।
तकनीकी इस जाल में, उलझा अब इंसान।।

आवाज़ किसी की जोड़कर, कहलाएँ संवाद।
एआई कारीगरी, करे सत्य बर्बाद।।

अफवाहों के पंख हैं, तथ्य हुए लाचार।
बिना जाँच के बाँटते, खबरें लोग हजार।।

जो दिखता है स्क्रीन पर, उसको मत सच मान।
स्रोतों की पड़ताल कर, फिर करना सम्मान।।

लाइक मिले तो सच हुआ, कैसी अजब विचार।
लोकप्रियता सत्य ना, समझो यह व्यवहार।।

झूठ अगर मनभावना, सच लगे बेकार।
डिजिटल दुनिया पूछती, किसका है अधिकार?।

बॉटों भीड़ें बोलतीं, मानव जाए मौन।
किसकी आवाज़ असल है, पहचान सके कौन।।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh