चिट्ठी
चिट्ठी जब-जब आती है,
अलग सूचना लाती है।
चिट्ठी में सुख-दुःख की बातें,
प्यार भरी इसमें सौगातें।
जहाज़, रेल, बस, नाव से,
मीलों तय कर आती है।
चिट्ठी जब-जब आती है।।
आता डाकिया घर के द्वार,
भरकर लिफाफे में प्यार।
छोटे से कागज़ में लिपटी,
संदेश नया सुनाती है।
चिट्ठी जब-जब आती है।।
चिट्ठी एक सुंदर उपहार,
जोड़े सबके दिल के तार।
करके दुनिया भर की सैर,
बिना पैर चली आती है।
चिट्ठी जब-जब आती है।।
चिट्ठी में फरमाईश है,
रिश्तों की आजमाईश है।
हाल-चाल की बात पूछती,
प्रेम भाव सिखलाती है।
चिट्ठी जब-जब आती है।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
