दुआ और बद्दुआ
दुआ वो दौलत है,जिसके आगे ताज भी झुक जाता है,
जिसके लिए अमीर भी हाथ उठाकर माँगता है।
बद्दुआ वो आग है,जो महलों को भी जला जाती है,
जिससे भिक्षुक की रूह तक सहम जाती है।
किसी के दर्द पर मरहम बनकर मुस्कुरा देना,
किसी की सूनी आँखों में उम्मीद जगा देना।
याद रखना,दुआ कभी खाली नहीं जाती,
नेक नीयत की खुशबू दूर तलक फैल जाती।
जिस दिल को तुमने आँसू देकर तोड़ दिया,
जिसका हक़ छीनकर उसे तन्हा छोड़ दिया।
उसकी आह अगर आसमान तक चली गई,
तो समझो तुम्हारी खुशियों की नींव हिल गई।
न दौलत साथ जाएगी,न ऊँचा मुकाम जाएगा,
अंत में इंसान के कर्मों का हिसाब आएगा।
जिसे तुमने दिया होगा सम्मान और सहारा,
वही दुआ बनकर करेगी जीवन उजियारा।
इसलिए किसी के दिल को दुखाने से पहले ठहर जाना,
किसी की आँखों में आँसू देने से पहले संभल जाना।
किशन दुआ कमाओ,क्योंकि यही असली ख़जाना है,
बद्दुआ से बचना ही जीवन का सबसे बड़ा फ़साना है।
— किशन सनमुखदास भावनानी
