कहानी

कहानी – कब रुकेगी यह बारिश?

लगभग तीन बज रहे थे। पूरा आकाश काली पुतलियो से घिरा हुआ था। सभी विद्यालय की छुट्टी होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। कब छुट्टी हो और कब हम नौ- दो ग्यारह हो !
तभी अचानक जोर से छम – छम करते हुए तेज बारिश शुरू हो गई।
‘अब घर कैसे जाएंगे ! ‘ लगभग सभी के मन मे यही सवाल था।
सभी शिक्षक कुछ न कुछ जुगाड़ कर धीरे-धीरे अपने घर को निकल गए। लेकिन एलेन और रजनी दोनों वही बारिश रुकने का इंतजार करते रहे।बारिश थमने का नाम ही न ले रहा था। मिनटे अब घंटो मे बदलने लगा था, जैसे सारा पानी आज ही ऊपर वाले को निकालने की मर्जी है।
‘ कब रुकेगा, यह बारिश? ‘ मैडम रजनी ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा।
दोनों इधर-उधर की बातें करते रहे। कुछ – कुछ मिनट के बाद ही ‘कब रुकेगा, यह बारिश ‘ की ध्वनि गूंजती। वैसे मैडम आप घर पर फोन कर दीजिए, सब इंतजार कर रहे होंगे! एलेन ने कहा।
दो पल मौन होकर – जी.. . करुंगी। थोड़ा और इंतजार कर लेती हूं। रजनी ने कहा।
‘ जी, कोई बात नहीं। मैं तो इसलिए कहा कि आपके घरवाले टेंशन कर रहे होंगे ‘। एलेन ने कहा।

दोनों इधर-उधर की बातें करते रहे। मगर बारिश अब भी थमने का नाम ही न ले रहा था। आखिरकार,
एलेन सर ने एक कैब बुक किया, और दोनों वहां से निकल पड़े। मिनट में ही रास्ता तय हो गया।
दोनों अपने-अपने घर पहुंचे।
अब एलेन को जब भी वक्त मिलता, रजनी से थोड़ी औपचारिक बातें कर ही लेता, लेकिन उसका शांत और गंभीर सवभाव एलेन को जरूर हमेशा कटघरे में खड़ा कर देता है। वह उन्हे बहुत समझने का प्रयास करता, लेकिन वक्त ने कभी उषे अवसर नहीं दिया।
एक दिन लंच ब्रेक के दौरान रजनी मैडम को अकेले गुमसुम बैठे देखा।
वह उनके पास जाकर एलेन ने पूछा – क्या हुआ मैडम? आपकी तबीयत तो ठीक है ? उसने चिंता भरे स्वर में पूछा।
हां, बस सुबह थोड़ी सी बुखार थी, अभी सर दर्द हो रहा है। मैडम रजनी ने बताया।
मैडम, यदि आज बुखार था तो अवकाश ले लेती। विद्यालय आने की क्या जरूरत थी? सिर दर्द की गोली ला दूं क्या ? एलेन ने पूछा।
अरे नहीं, घर पर भी बोर हो जाती, इसलिए आ गई। मैडम रजनी ने प्रति उत्तर में जवाब दिया।
हां, वह तो ठीक है, बट आप प्रिंसिपल सर को बोल कर घर जाकर रेस्ट कीजिए। एलेन ने सलाह दिया।
रजनी मैडम भी वहां से घर को निकल गई। पीछे-पीछे एलेन सर को देख, ‘आप जाइए मैं चली जाऊंगी। ‘ रजनी मैडम ने कहा।
‘अरे कोई नही, आप चलिए मैं छोड़ देता हूं। ‘
रास्ते में चलते हुए एलेन झिझकते हुए पूछा – – मैडम, क्या आज सर घर पर नहीं है ?
रजनी कुछ पल चुप रही, फिर शांत स्वर में बोली –
नहीं – -मैं अकेली ही रहती हूं। रजनी के इतना कहते ही एलेन कुछ पल के लिए चुप हो गया, फिर धीरे से बोला –
ओके, सर कहीं और नौकरी करते है क्या?
रजनी ने उसकी और देखा उनके चेहरे पर एक हल्की सी उदासी उतर आई।
नहीं, वो अब इस दुनिया में नहीं रहे।उनकी मृत्यु हो चुकी है।
रियली, आइ एम सॉरी मैडम, मुझे बिल्कुल मालूम नहीं था। कुछ पल दोनों में मौनता छा गई, फिर एलेन ने धीमें स्वर में पूछा।- –
‘ आप यहा अकेली रहती हैं ?’ एलेन ने पूछा।
हां, किराये मे और लोग है। मैं अपने कमरे में अकेली ही रहती हूं।
ओके, कुछ सहज होते हुए, ठीक है मैं चलता हूं आप रेस्ट कीजिए। किसी चीज की जरूरत होŕ तो बताइएगा प्लीज! इतना कह एलेन वहां से निकल गया।
रजनी कमरे में आते ही लेट गई। जैसे ही आंखें बंद हुई सागर की यादें फिर से ताजा हो गया। उनका मुस्कुराता चेहरा, साथ बिताए हुए पल और अधूरे सपने….. सब एक-एक कर आंखों के सामने आने लगे। उन्होंने मन ही मन कहा-
‘क्या बिगाड़ा था था मैंने किसी का जो ईश्वर ने मुझे इतनी जल्दी अकेला कर दिया ‘
सोचते …..सोचते …..।
उधर एलेन रास्ते भर सोचता रहा। ‘ कैसी भगवान की लीला है, इतनी कम उम्र में ही मैडम ने इतना बड़ा दुख सह लिया। बाहर से कितनी मजबूत दिखती है, लेकिन भीतर कितना बड़ा दर्द छुपाए बैठी है।’
‘ कुछ घंटे बाद हल्की सी दस्तक हुई। रजनी में ज्यो ही दरवाजा खोला।सामने एलेन को देख वह आश्चर्यचकित रह गई। ‘ अरे . . तुम ?
हा. ….।
रजनी हल्का सा मुस्कुराई, अब पहले से ठीक हूं मैंने।
अरे तुम, रजनी ने पूछा।
हां, यही से गुजर रहा था तो सोचा देखते चला जाता हूं। कैसा है अब तबीयत आपकी ?
ठीक है अब, पहले से ……।
‘ दवा लिया आपने ?’
‘ हां, ‘
इतने में डोरबेल फिर बजा।
बाहर एक डिलीवरी बॉय खड़ा था।
‘ मैडम आपका ऑर्डर’।’
एलेन ने आश्चर्य से पूछा- -‘ यह क्या है ‘?
‘ बस थोड़ा सा कुछ लंच मंगवा लिया, दोनों टाइम का हो जाएगा। ‘
‘ अच्छा किया, बीमारी में आराम करना ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है।’
ओके मैडम, मै चलू। आप रेस्ट कीजिए।
हा एलेन, वैसे थैंक्स, तुम देखने आए मुझे।
‘ अरे कोई बात नहीं, मुझे तो अभी भी जाने की इच्छा नहीं हो रही है, लेकिन जाना होगा। ‘
अब एलेन को मैडम की ज्यादा ही चिंता सताने लगी। उधर रजनी के अंदर भी मानवीय भावनाओं की लहर दौड़ पड़ी। अब अक्सर दोनों ही मिलने के बहाने ढूंढते। यहां तक की अब वह विद्यालय भी जाते तो दोनों रास्ते में साथ हो जाते।
कभी-कभी रजनी दोपहर के भोजन पर तो कभी डिनर पर एलेन को भी अपने साथ बुला लेती। दोनों एक – दूसरे को समझने का भरपूर प्रयास करते। छुट्टियों के दिनों में तो वह पूरे दिन रजनी के साथ ही बिताता। धीरे-धीरे दोनों में भावनाओं के साथ-साथ शारीरिक संबंध भी होने लगे। चुकी रजनी विधवा थी उसे संकोच जरूर होता, लेकिन वक्त की मांग और परिस्थितियो को देखते हुए वह मौन ही रहती।
वक्त बितता गया। दोनों के बीच सम्मान की चरम सीमा भी बढ़ता ही गया। आसपास के लोगों की नजरे भी उन पर पडऩे लगी। अचानक एक दिन रजनी मैडम के पेट में दर्द की शिकायत हुई। डॉक्टरी जांच से पता चला कि ‘ वह मा बनने वाली है”। डॉक्टर ने बड़ी ही खुशी जाहिर करते हुए कहा।
क्या ?? आश्चर्य भरे स्वर में मैडम ने कहा।
हां मैडम,
दो पल मौन हो, सर मैं यह बच्चा नहीं रख सकती। मुझे गर्भपात करवाना है। रजनी ने फौरन कहा।
एलेना मुख बंद कर सब कुछ सुनता रहा।
मैंडम, आप क्या बोल रही है, गर्भपात ! डॉक्टर साहब ने आश्चर्य से कहा।
मैडम, अब तो पांचवा महीना चल रहा है। अब यह नहीं हो सकता। गर्भपात यानी सीधा हत्या !! रजनी के पैरों तले जमीन खिसक गया। दोनों ही कुछ वक्त के लिए परेशान भी हुए, लेकिन एलेन ने उस बच्चै को अपना कह मैडम को बहुत समझाया। परेशान रजनी के आंखों से आंसुओ की लहरे टपक रहा था। वह उन्हे समझाता रहा।
एलेन और रजनी के संबंध और गहरा होता गया। नौ महीने बीतता ही जा रहा था। तभी एक प्यारे से बच्चे का जन्म हुआ। बच्चों के आने से उनके जीवन मे फिर से मुस्कुराहट लौट आई। रजनी ने मातृत्व अवकाश लेकर पूरे मन से बच्चे की देखभाल किया। एलेन भी हर जिम्मेदारियां में उसका पूरा साथ देता। दोनों मिलकर माता-पिता का हर फर्ज निभाते।
हालांकि, एलेन हमेशा समय पर ही अपने घर लौट जाता, ताकि किसी को उस पर संदेह न हो। उधर माता-पिता उसके विवाह के लिए एक अच्छी लड़की की तलाश करने लगे। शुरू शुरू में तो वह हर रिश्ते को किसी न किसी बहाने से टाल देता था, लेकिन समय के साथ घर वालों का दबाव बढ़ने लगा।
अब वह पहले की अपेक्षा अधिक परेशान रहने लगा। एक दिन रजनी ने उसकी उदासी का कारण पूछा। बहुत जिद्द के बाद एलेन ने सारी बात बताई।
कुछ क्षणों के लिए तो रजनी भीतर तक टूट गई। पर अगले ही पल उसने अपने मन को कठोर किया और शांत स्वर में बोली –
एलेन मैं तुम्हारी बहुत इज्जत करती हूं, लेकिन तुम्हे अपनी मम्मी- पापा की भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए। आखिर कार, तुम उनके इकलौते बेटे हो। उन्होंने भी तुम्हारे भविष्य के लिए बहुत से अरमान सजाए होंगे।
एलेन ने तुरंत कहा, ‘ मुझे शादी नहीं करनी ‘।
रजनी ने उसकी ओर देखा और बोली-
‘ ऐसा मत कहो।’
फिर मैं क्या करूं’ ? एलेन की आखे नम हो गई। रजनी ने गहरी सांस ली।
यह वक्त उसके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था।
मैं तुम्हारे मनः स्थिति समझ सकती हूं। उसने धीमे स्वर मे कहा।
लेकिन तुम मेरी चिंता मत करो, तुमने मुझे जीने का सहारा दे दिया है। इस बच्चे के रूप में तुमने मुझे ऐसा अनमोल उपहार दिया है, जिसका कर्ज मैं जीवन भर नहीं चुका सकती।
अब मुझे अपनी ही नजरों में मत गिरने दो।
‘ तुम्हारी बाराती, मेहंदी, तुम्हारी नयी जिन्दगी तुम्हारा इंतजार कर रही है। वैसे भी तुम्हारी उम्र ही क्या है ? तुमने अभी तक शादी भी नही किया है। प्लीज, अपने माता-पिता का दिल मत तोड़ो।
एलेन उनकी बातें सुनता रहा।
आखिरकार, वह माता-पिता की इच्छा अनुसार उसका विवाह पीपा के साथ हो गया।
विवाह में रजनी भी आमंत्रित थी।
चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन आंखों में अनगिनत भावनाएं तैर रहे थे। एलेन भी बार-बार उनकी ओर देखता। फिर अपनी नज़रें झुका लेता।
तभी सामने खड़े फोटोग्राफर ने कहा- ‘ मैडम… सर…. एक फोटो प्लीज !’
रजनी ने फौरन बच्चे को गोद में उठाया, और उनके पास जाकर खड़ा हो गया। दोनो के चेहरे पर सजी मुस्कान त्याग, प्रेम और अधूरी रिश्ते की पूरी कहानी कमरे में कैमरे में कैद हो गया……।

— डोली शाह

*डोली शाह

1. नाम - श्रीमती डोली शाह 2. जन्मतिथि- 02 नवंबर 1982 संप्रति निवास स्थान -हैलाकंदी (असम के दक्षिणी छोर पर स्थित) वर्तमान में काव्य तथा लघु कथाएं लेखन में सक्रिय हू । 9. संपर्क सूत्र - निकट पी एच ई पोस्ट -सुल्तानी छोरा जिला -हैलाकंदी असम -788162 मोबाइल- 9395726158 10. ईमेल - shahdolly777@gmail.com

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