मोबाइल, नेटवर्क और सपने : लेकिन महिलाएं अब भी बाहर क्यों?
हर सुबह घर में रोशनी से पहले जिम्मेदारियां जाग जाती हैं, और उसी के साथ एक महिला भी। मोबाइल की
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Read Moreरंग केवल देखने की वस्तु नहीं हैं, बल्कि वे हमारे मन, सोच और भावनाओं से गहराई से जुड़े होते हैं।
Read Moreरानापुर गांव की साधारण-सी मिट्टी पर उस दिन असाधारण इतिहास अंकित हुआ, जब एक सामान्य महिला ने अद्वितीय साहस दिखाकर अपने
Read Moreजिस दिन कोई युवती यह कह देती है—“मुझे माँ नहीं बनना”, उस दिन समाज की सबसे सुरक्षित मान्यता असुरक्षित हो जाती
Read More26 जनवरी की सुबह कोई साधारण सुबह नहीं होती। उस दिन सूरज की किरणें सिर्फ़ रोशनी नहीं लातीं, वे आत्मसम्मान की लौ
Read Moreरसोई की दीवारें केवल ईंट-सीमेंट की बनी हुई संरचना नहीं होतीं, वे उस सामाजिक सोच की मूक प्रतीक हैं जिसने सदियों
Read Moreभारत की संसद ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया – एक ऐसा कानून जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में
Read Moreघर के भीतर सबसे गहरी खामोशी तब जन्म लेती है, जब माँ सामने होते हुए भी भीतर से अनुपस्थित होती है।
Read Moreसमाज की सबसे अँधेरी सच्चाइयाँ अक्सर उन घरों में छिपी होती हैं, जहाँ रोशनी के नाम पर सिर्फ मजबूरी जलती है।
Read More“सुरक्षा” एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही मन में भरोसे और संरक्षण की छवि उभरती है। यही शब्द माता-पिता की
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