कुण्डली/छंद

चौपाई छंद

कागज ले बैठी शरमाती।

लिख दूँ प्रियतम को मैं पाती।।

अँसुवन धारा रोक न पाऊँ।

आखर-आखर प्रेम जताऊँ।।

बाट निहारूँ विरहन निश-दिन।

हाल सुनाऊँ सजना पल-छिन।।

चिट्ठी प्रियतम आस जगाएँ।

दिल की सरगम साज सजाएँ।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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