अम्मा रोटी गोल बनाती
अम्मा रोटी गोल बनाती ।दाल – भात के संग खिलाती।। गोबर के उपले जलते हैं।साँझ हुई सूरज ढलते हैं।।चूल्हे में
Read Moreअम्मा रोटी गोल बनाती ।दाल – भात के संग खिलाती।। गोबर के उपले जलते हैं।साँझ हुई सूरज ढलते हैं।।चूल्हे में
Read Moreश्रम से नहीं उबरती माँ।हर पल उद्यम करती माँ।। निज संतति की ईश्वर जो,नहीं किसी से डरती माँ। पुत्री-पुत्र प्रसविनी
Read Moreधूम रसायन से भर डाला।नील गगन काला कर काला।। औंधा है ज्यों बड़ा कटोरा।नहीं समझना ओढ़ा बोरा।।सहज स्वच्छ हो गगन
Read Moreमियाँ मिट्ठुओं का जमाना है।यदि आपको अपने को ऊपर उठाना है,तो ये आपका जमाना है।आप जमेंगे ही नहीं,नाकों नाक तक
Read Moreबौराए हैं आम बाग मेंमहक रही है अमराई। ऋतु वसंत का हुआ आगमनकुहुक-कुहुक कोकिल कूकेकानों में अमृत घुलता हैनहीं एक
Read Moreनील गगन की विमल छटा है।नहीं तनिक भी कहीं घटा है।। चैत्र मास मधु बाँटे प्रतिदिन,अलि गुंजन से बाग पटा
Read Moreबचपन में हमें प्राथमिक कक्षाओं से ही फूल बनाने की कला में पारंगत करने की कला का अभ्यास कराया जाता
Read Moreकुहू -कुहू कोकिल करे,फागुन मास धमाल।डफ-ढोलक बजने लगे,उड़ने लगा गुलाल।। बरसाने की राधिका, नंदगाँव के श्याम,ब्रजबालाएँ साथ में, नृत्यलीन ब्रज
Read Moreबेकस अदाओं की तेरीदीवानगी ने मार डाला। ओट खिड़की की बचाकरनज़र अपनी देखतीआँखें चुराकर विकल हिरनीमधुर तेरे बोल दोमनुहार बाला।
Read Moreकोयल कुहू- कुहू कर बोली।उठो बालको आई होली।। फूल खिले हैं क्यारी -क्यारी।रंग-बिरंगी है तैयारी।। गेंदा और गुलाब महकते।जिन पर
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