Author: *डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम'

गीत/नवगीत

खनकें चूड़ीं बारम्बार

घरनी की दोमृदुल कलाईखनकें चूड़ी बारम्बार। पग में पायलकमर करधनीहाथों में संगीत उभार।कहती हैं क्याहरी चूड़ियाँखोलो साजन बन्द किवार।। समझें

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बाल कविता

शीतकाल सौगातें लाया

शीतकाल सौगातें लाया।ठंडी ऋतु का मौसम भाया।।छोटे दिन की लंबी रातें।अगियाने पर होतीं बातें।।गरम रजाई ने गरमाया।शीतकाल सौगातें लाया।।गज़क तिलकुटी

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बाल कविता

हुक्का,गुटका,चिलम, तँबाकू

हुक्का,गुटका,चिलम, तँबाकू।नर- जीवन के हैं सब डाकू।। हुक्के में जो धुँआ उड़ाता।नश्तर तन में स्वयं चुभाता।। सट-सट धुँआ चिलम से

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