नवगीत – धूप क्यों शरमा रही है
धूप क्यों शरमा रही हैआ गया है मीत अगहन। भोर अँगड़ाई लिएअब उठ गई हैएक पिड़कुलियाभजन गाती उठी हैदाल अरहर
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Read Moreजग की शोभा पेड़ – लताएँ।अधिकाधिक हम पेड़ उगाएँ।। जहाँ पेड़ हों शांति समाए।छाया मिले अतिथि ठहराए।।रहते खग पशु भैंसें
Read Moreताश के खेल में भला ‘तुरुप’ या ‘तुरुप के पत्ते’ को कौन नहीं जानता! इसमें एक छोटे से छोटे पत्ते
Read Moreजीवन है तप – साधना , वचन तोल कर बोल।वृथा नहीं गारत करे, रहे सदा अनमोल।। कर्मयोनि ही जानिए, रहे
Read Moreकरें वनों की हम रखवाली।बन पेड़ों के सब वनमाली।। प्रकृति सब पेड़ों को बोती।धरती पर हरियाली होती।।होती है छवि सुघर
Read Moreइन रावणों के बीच मेंएक राम को आराम कब है! भ्रष्ट नेता त्रस्त जनताअँधियाँ उड़ते बगूलेचाहिए आधा कमीशनक्यों न महँगाई
Read Moreसब में एक हिंदी अपना ज्ञान है, हिंदी ही सम्मान।हिंदी के हम भक्त हैं, हिंदी ही प्रज्ञान।।हिंदी भी यह जानती,
Read Moreआग चारों ओर लगी हैदेश को बचाना है,बारूद का ढेरबैठा हुआ देश परईश्वर ही बचाए इसे। कब सुलग उठेगी आगकोई
Read Moreअन्नदाता को नमन शुभ धन्यता है आपसे। गाँव से कुछ दूर खेतों में भरा जलकृषक ले अर्धांगिनी उसका वही बलपौध
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