छरर -छरर छर बरसें
छरर-छरर छरछर-छर बरसेंआसमान से बूँदें। फैला अपनेहाथ हथेलीभर-भर अँजुरी पीतेजेठ मास केप्यासे मानवथे मुरझाए जीतेगिरतीं बूँदेंजब पलकों परनयन सभी हम
Read Moreछरर-छरर छरछर-छर बरसेंआसमान से बूँदें। फैला अपनेहाथ हथेलीभर-भर अँजुरी पीतेजेठ मास केप्यासे मानवथे मुरझाए जीतेगिरतीं बूँदेंजब पलकों परनयन सभी हम
Read Moreदेख तरक्की देश की, फन फैलाए व्याल।अवसर देखें छद्म से, बने हुए हैं काल।। कुटिल दृष्टि है गीध की, कॉकरोच
Read Moreनहीं दाल में कालासारी दाल हो गई काली। राम दान केसभी लुटेरेपहने पीत चदरियातिलक लगाए रामचन्द्र काबसते औध नगरियाराम पाँव
Read Moreधूम रसायन से भर डाला।नील गगन काला कर काला।। औंधा है ज्यों बड़ा कटोरा।नहीं समझना ओढ़ा बोरा।।सहज स्वच्छ हो गगन
Read Moreबहुत ही प्रसिद्ध कहावत है कि ऊँट की चोरी निहुरे- निहुरे नहीं होती।पर यहाँ तो हो गई।शायद चोरों को इस
Read Moreरावण की तुन्दी में गहरा बाण लगा है।कहता देश ठगों ने सारा देश ठगा है।। मंदिर में रहने वालों ने
Read Moreपानी से हैं प्राण हमारे।पानी से हम जीवन धारे।। पानी हमें बचाना अपना।जीवन है पानी बिन सपना।।मिले नहीं तो दीखें
Read Moreरात -रात भर परखा तेराभौं -भौं का भौकाल। बहुत गलत है कुत्सा कहनाकुत्ता भी अपमानवाक़्-सिद्धि पाई है तुमनेतुम मानव की
Read Moreकिसी कवि ने क्या खूब कहा है: ‘लड़की वह अचार की मटकी,हाथ लगे कीड़े पड़ जाएं।’ नारी की नाजुकता की
Read Moreब्याह हुआ दुल्हन नई,प्रिय लगती ससुराल।मात-पिता बैरी लगें, घर में करें बवाल।। बिगड़ गए हैं आज के, बेटे करें कुसंग,सुरापान
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