नवगीत – किटकंनों की पगडंडी
डॉट पैन तब न थी नोटबुककिटकंनों की पगडंडी। एक हाथ में तख्ती लटकीकंधे पर बस झोलानाम मात्र की तीन किताबेंचंचल
Read Moreडॉट पैन तब न थी नोटबुककिटकंनों की पगडंडी। एक हाथ में तख्ती लटकीकंधे पर बस झोलानाम मात्र की तीन किताबेंचंचल
Read Moreविचारणीय प्रश्न यह है कि उल्लू सदैव टेढ़ा ही क्यों होता है,जिसे सीधा करने की आवश्यकता पड़ जाती है ?
Read Moreउषा जगी प्राची में भोली।लगा भाल पर अरुणिम रोली।। भानु जगाया उठो चलो अब,जाग उठे खगदल हमजोली। चह- चह कर
Read Moreवे हिंदी साहित्य के बहुत बड़े संपादक जी हैं। उन्होंने अब तक पचास साझा काव्य संग्रहों और पचास पुस्तकों का
Read Moreमफ़लर बाँधे शॉल लपेटेनिकल पड़े हैं सूरज दादा। बेलें वृक्ष शांत हैं सारेचादर ओढ़ कुहासे वालीमौन खड़े हैं जमे तुहिन
Read Moreनए वर्ष का नया सवेरा।मिटा गया गत सघन अँधेरा।। मास जनवरी पौष महीना।दूर देह से हुआ पसीना।।भरा कुहासा नहीं उजेरा।नए
Read Moreचंचल चपल चुलबुला बचपन।दिखलाता है कितने ठनगन।। खेल खेलना लगता उत्तम,बचपन से जीवन हो शोभन। अम्मा दादी लाड़ लड़ाएँ,बाबा कहें
Read Moreशुद्ध स्वच्छ हो अगर रसोई।रोग न वहाँ रुकेगा कोई।। सब्जी चावल दाल पकाओ।कुछ भी किंतु स्वच्छता लाओ।।शुद्ध तवा हो या
Read Moreघोड़ी सजी दूल्हा नहींबारात के बिन बैंड का क्या? हाथ में चिमटा लिए वीरांगना हैउधर दारू में मगन धुत साजना
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