दीपोत्सव-अभिनंदन
तिमिर और दीया लड़ रहे हैं लड़ाईएक चिंगारी से मात, तम ने है खायी अंधेरे ने जब कद अपना बढ़ायादेख
Read Moreतिमिर और दीया लड़ रहे हैं लड़ाईएक चिंगारी से मात, तम ने है खायी अंधेरे ने जब कद अपना बढ़ायादेख
Read Moreहम रूप अनोखे धर कर, कई भेष में रहते हैंहैं ये अभिमान कि हमको , इस देश में रहते हैं
Read Moreरेल में यात्रा करना एक अनुभव है – कभी सुखद , तो कभी दुखद! यदि समय रहते आरक्षण मिल जाए
Read Moreमैं हूँ तात तुम्हारी रचना।नहीं छोड़कर इन चरणों को,और कहीं भी मुझको बसना। अपनी नींदे देकर तुमने, कितनी मेरी रात
Read Moreलातों के ये भूत हैं मोदी! बातों से ना मान रहेपीठ में छूरा घोंप के बैरी, अपना उल्लू साध रहेमान-मुनौअल
Read Moreमेरे वीर जवानों के प्रभु, जीवन रक्षक बन जाना,और धधकते शोलों को तुम, हिमकण जैसा बरसाना। मातृभूमि के दीवाने ये,
Read Moreशर्म करो तुम छेद कर रहे,खाते हो जिस थाली में,क्या अंतर है तुममें और, उस कीड़ेवाली नाली में। कुत्ता भी
Read Moreजब जी चाहा सीमा लाँघी,जी भर की तुमने चालाकी,खूँ से घाटी को लाल किया,वाशिंदों को बेहाल किया,हमने न धीरज-पथ त्यागा,ना
Read Moreदुनिया में लोग मृत्यु को रहस्य कहते है। एक व्यंग्यकार की दृष्टि से मुझे तो यह संसार का सबसे बड़ा
Read Moreआओ हे नव वर्ष! हर्ष बरसाते आओसुख-समृद्धि मेघ रूप धर, तुम छा जाओ ॠतुंभरा का कण-कण, स्वागत करने आतुरतृण-तृण पलक
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