साहित्य का नवजुगाड़वाद
साहित्य हमारा अंधेरे में है। आज के साहित्यकारों को पता नहीं है साहित्य का कौन सा वाद या युग चल
Read Moreसाहित्य हमारा अंधेरे में है। आज के साहित्यकारों को पता नहीं है साहित्य का कौन सा वाद या युग चल
Read Moreमैं नवजुगाड़वाद का लेखक हूँ । ठंडा दूध भी फूंक-फूंककर पीता हूँ। उदार हृदय होने के कारण सरकार की बुराई
Read Moreराम नाम की लूट है, लूट सके तो लूटअंतकाल पछताएगा, जब प्राण जाएँगे छूट।मौका है नेता जी आप भी वैतरणी
Read Moreएक कवि की प्रेमिका ने कवि से कहा कि तुम दूसरे की सुंदरता पर खूब तारीफ लिखते हो। कभी मेरी
Read Moreबार-बार रचना पत्रिका के संपादक जी को भेजते-भेजते थक गये हैं। अगर पत्रिका में जगह नहीं मिली। इसका सीधा सरल
Read Moreअभी अँगूठे का ही जमाना है। पहले लोगों को ऊँगली या अँगूठा दिखा दो तो लोग लाठियाँ निकाल लेते थे।
Read Moreचुनाव संपन्न हो चुके थे। लोकतंत्र का महाकुंभ अब “रिज़ल्ट दर्शन” की साधना में लीन था। टिकड़मों की ढोलक बज
Read Moreचंदाराम पढ़ लिखकर नौकरी की तलाश में थे। विपत्ति की मारी सरकार बेचारी रोजगार नहीं दे सकी। नून-तेल के लाले
Read Moreअरें सुनो भोंका राम जी सुबह सवेरे ये कैसी बातें कर रहे हो । किसी भक्त की अगर मनवांछित मनोकामना
Read Moreबहुत ही प्रसिद्ध कहावत है कि ऊँट की चोरी निहुरे- निहुरे नहीं होती।पर यहाँ तो हो गई।शायद चोरों को इस
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