युद्ध की विभीषिका से स्थिति गंभीर होगी
युद्द से महंगाई बढ़ती है और विकास के पहिए रुक जाते है | सब चीज की परेशानी बढ़ती ही जाएगी जिसका असर सभी देशो पर पड़ेगा | वर्तमान में चलरहे अमेरिका ,इराक,ईरान इजराइल युद्द के समाचार ज्यादा सुर्ख़ियों में है | इससे समूचे विश्व में भय का वातावरण निर्मित हो रहा है | कोई अपनी हठधर्मिता से पीछे हटने को तैयार नहीं | एक देश दूसरे देश पर आर्थिकता का लाभ उठाने के चक्कर में उलझा हुआ है |कई देश युद्ध करने वाले दोनों पक्ष को लड़ने में अंदुरनी मदद कर रहे है | ऐसा लगता है कि अब हथियारों की खेती की जाने लगी है हर कोई बेहतर उपज के लिए हथियारों की होड़ में लगा हुआ हैं |परमाणु हथियारों की होड़ और प्रयोग में पर्यावरण की चिंता नही युद्द से प्रदूषण फैलता है |जिसमे विश्वशांति,मेत्रीयता,आर्थिक परस्पर सहयोग नदारद सा होता प्रतीत होगा | यदि युद्द की सुलगती आग को समय पर ना रोका गया तो ये एक न एक दिन विश्वयुद्ध का रूप धारण कर लेगी| जिसमे जो देश शांति से बैठ कर विकास का सपना संजोए हुए वे इन देशों को युद्ध के कारण वे बढ़ती महंगाई से आर्थिकता की चक्की में पीसे चले जाएंगे |युद्ध रोकने हेतु कोई देश ने आगे बढ़कर इसका हल बातचीत कूटनीति से निकालना होगा|
— संजय वर्मा ‘दृष्टि’
