पावस
पावस आएँ मन हरषाएँ।धरती चादर हरित बिछाएँ।।नभ में काले बादल छाए।नाचे मोर पपीहा गाए।। बूंदन की झर लगती न्यारी।भीगें बाग-बगीची
Read Moreअलख सुबह मित्र यमराज ने फोन घनघनाया,मुझे गुस्सा तो आया फिर भी फोन उठायाक्या यार! सुबह-सुबह और कोई काम नहीं
Read Moreआज सुबह-सुबह मित्र यमराज ने फोन करके बताया कि वह आ रहा है और नाश्ता हमारे साथ ही करेगा।
Read Moreआज रात प्रभु श्रीराम जी अभी अपने शयनकक्ष में पहुँचे ही थे कि पीछे से यमराज भी पहुँच गए, उन्हें
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