Author: *सुधीर श्रीवास्तव

कविता

आभासी मंचों से लाभ-हानि

येलाभहानि काचक्कर भीउलझा देताहम मानवों कोकैसी विडंबना है। येसोच हमारी आभासी हैतो क्या हो गयालाभ-हानि तो होगा सोच पर निर्भर। देरहासबको अवसरलाभ उठाओया गर्त

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हाइकु/सेदोका

विश्व साइकिल दिवस

आज साइकिल दिवस हैं चलाएं हम आजतुम्हारे लिए। बिना तेल पेट्रोल केदौड़ाते सब साइकिल तुम्हारे लिए। स्वास्थ्य की संजीवनी है चलाते जो साइकिल तुम्हारे

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