सम्मान पत्र और यमराज
अभी-अभी यमराज ने फोन कर मुझे जगाया और फरमाया,प्रभु! सोना छोड़ो और जल्दी से एक कविता लिखो,बदले में सम्मान पत्र का
Read Moreअभी-अभी यमराज ने फोन कर मुझे जगाया और फरमाया,प्रभु! सोना छोड़ो और जल्दी से एक कविता लिखो,बदले में सम्मान पत्र का
Read Moreअपना आज सुधारना, यही समय की सीख।वरना फिर तैयार हो, चलो माँगने भीख।।मांगोगे तुम भीख, और मत देखो सपना।बोरा बिस्तर
Read Moreसोचो समझो फिर करो, अपना आज सुधार। क्योंकि मिलता है नहीं, ये तो कहीं उधार।। ये तो कहीं उधार, हृदय
Read Moreकल दोपहर मैं अपनी आड़ी-तिरछी रचनाओं में उलझा हुआ था,कि मित्र यमराज कबाब में हड्डी सरीखे आ गएस्वागत सत्कार जलपान की परंपरा
Read Moreशिव का सावन माह मनोहर।हर जन-मन को लगता सुंदर।।शिव जी के मन को ये भाए।प्रकृति संग ये खूब सुहाए।। सावन
Read Moreकितना करते हैं हम-आप जितना कहते फिरते हैं,ईमानदारी से सोचिए कितना विचार करते हैं?मगर आप क्यों करेंगे?आपकी आँखों का पानी जो मर
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