डिफॉल्ट

कुंदन

तप की आँच सहन जो करता।
नहीं किसी से है वो डरता।।
मन के सारे मैल मिटाता।
गीत स्वार्थ के कभी न गाता।।

सारे दुख जो हँसकर झेले।
बन कुंदन सम हर पल खेले।।
राम-नाम कुंदन सम प्यारा।
कट जाता भव बंधन सारा।।

यह समाज की भट्टी भारी।
बन कुंदन तपते नर-नारी।।
निज चरित्र जो उज्ज्वल रखता।
कुंदन हम वो सदा चमकता।।

सच का है संकट से नाता।
कुंदन कब किसको भरमाता।।
दीन-दुखी की सेवा करना।
कुंदन बनकर सदा चमकना।।

भेदभाव से कैसा नाता।
कुंदन खुद कब कहे विधाता।।
जो भी पावन निर्मल रहता।
ईश्वर नाम जाप वो करता।।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921

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