यमराज और सपनों की उड़ान
आज सुबह यमराज से मुलाकात
के बाद सपनों की उड़ान पर बहस हो गई।
उसने कहा – सपनों की उड़ान कैसी होती है?
क्या मेरी उड़ान से भी प्यारी होती है?
पहले तो मैं झुंझलाया, फिर समझाया
तेरे सपनों के उड़ान की कोई बराबरी ही नहीं है,
पर हमारे सपनों के बहुतेरे रंग है
कुछ जो सिर्फ उड़ान भरते हैं
तो कुछ सिर्फ सपनों में ही उड़ान भरकर
खुद को बड़ा तीसमार खाँ समझते हैं।
मेरी बात सुन यमराज कहने लगा-
प्रभु के आप के समाज में विडंबनाएं बहुत हैं
इससे अच्छी तो हमारी कुंठाएंँ हैं
आप सपनों की उड़ान को वो भाव नहीं दे पाते
जो आज नहीं तो कल आपको मंजिल तक ले जाते।
अच्छा है! आप सब इसी उहापोह में
जी भरकर डूबते उतरवाते रहिए
हमारे चेलों की हौंसला अफजाई करते रहिए
हमसे यूँ ही प्यार से भेंट मुलाकात करते रहिए
चाय-कॉफी, नाश्ता-खाना से मेरा स्वागत करते रहिए
जब कभी आपका खिन्न हो तो
सिर्फ और सिर्फ हमसे ही लड़ते रहिए
सपनों की उड़ान भरिए न भरिए
अपनी मंजिल को छूते रहिए,
बस!अब एक अद्धा पिलाकर मुझे विदा करिए
और कम से आप तो सपनों की नई उड़ान भरिए
मेरा धन्यवाद आभार करना बिल्कुल न भूलिए।
