यहाँ हर शख्स झूठा है
लोग मानते जा रहे हैं,अंधाधुन होके मानते जा रहे हैंइससे बेखबर,हों आँखों में सभी पट्टी बांधे जा रहे हैं।सच कोई
Read Moreलोग मानते जा रहे हैं,अंधाधुन होके मानते जा रहे हैंइससे बेखबर,हों आँखों में सभी पट्टी बांधे जा रहे हैं।सच कोई
Read Moreपेड़ों से हरियाली है, और धरती का श्रृंगार हैचलो इसको सजाएं, आएगी इससे बहार है। हरियाली जरूरी है, इसी से
Read Moreमेरा गाँव मुझे आज भी बहुत याद आता हैगांवों से दूर हूँ फिर भी,पास नजर आता हैमाना की यहाँ पे
Read Moreकभी अनदेखा नही करना अपनों सेदिल से दिल का रिश्ता बनाये रखनाबेगाने कभी काम नही आएंगे तुम्हारेअपनों पे हमेशा विश्वास
Read Moreये कैसी जद्दोजहद से भरी है जिंदगी!किसी को सारे आकाश की मिली है खुशी,तो कोई मुट्ठी भर खुशी के लिए
Read Moreइंसानों की बस्ती में, हैवानों का ही बसेरा हैबच के रहना मेरे यारों,यहाँ हर कोई लुटेरा है। हैवानियत जाग गई
Read Moreहमारा देश सदियों से धार्मिक और सांस्कृतिक सद्भावना का केंद्र रहा है।जहाँ पर यहाँ के जन-मानस में अपने धर्म के
Read Moreमेरे देश की पावन धरती तुझको सौ-सौ बार नमनतुझ पर मैं बली-बलि जाऊँ,कर लूं नित-नित वंदन। निश दिन तुम उपकार
Read Moreपाश्चात्य संस्कृति की अंधी दौड़ में हम भारतीय इतने अंधे हो गए हैं कि हम अपनी प्राचीन संस्कृति-सभ्यता, रीति-रिवाज, परम्पराएँ,
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