कविता

यहाँ हर शख्स झूठा है

लोग मानते जा रहे हैं,अंधाधुन होके मानते जा रहे हैं
इससे बेखबर,हों आँखों में सभी पट्टी बांधे जा रहे हैं।
सच कोई सुनता नही है, सच कोई बताने वाला नही
यहाँ हरेक शख्स झूठा है, यही सच जानते आ रहे हैं।

यह दुनिया दिखावे की है,इसी की यहाँ बोलबाला है
अंदर में बेईमानी है,और नियत में बस छलावा ही है
कोई करे तो करे किस पर यकींन,जताने वाला नही
यहाँ गैर तो गैर हैं,सब अपनों से ही लुटाये जा रहे हैं।

यहाँ का हर एक शख्स, कई-कई राज छुपाये हुए हैं
हर शख्सियत ईमान और इंसानियत दफनाये हुए हैं
कोई ईमान पर चलता नही, कोई मानने वाला नही
यहाँ हर कोई बेईमानी पर, मिशाल बनाये जा रहें हैं।

— अशोक पटेल “आशु”

*अशोक पटेल 'आशु'

व्याख्याता-हिंदी मेघा धमतरी (छ ग) M-9827874578

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