पावस
सावन की ठंडी फुहार ।
खुशियां लाई अपार ।।
नृत्य करे मन मयूर ।
कोयल गीत गाए मधुर ।।
नभ में काली घटा छाई ।
हृदय विरहन के उदासी लाई ।।
प्रीतम की याद घनी आई ।
शीतल बयार बहे सुखदाई ।।
धरती की बुझी प्यास ।
सूखे कंठ मिला अमृतरस।।
जागी एक नई आस ।
सुखमय हुई पावस ।।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
