आज़ादी के अमृतकाल में संकल्प, साधना और राष्ट्र निर्माण का पर्व
स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व या कैलेंडर का पन्ना मात्र नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत अमर सेनानियों के
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Read Moreजीवन के इस कठिन और तेज़ रफ़्तार दौर में जहाँ हर इंसान अपनी ही दुनिया, अपने स्वार्थ और व्यस्तता के
Read Moreहक़ की बातें न करूं मैं सच्चाई से दूर हो जाऊं,अपने ज़मीर से लड़लूं, कोई अख़बार हो जाऊं। मेरे दिल
Read More‘तेरी मेरी यारी’… यह महज़ दो शब्दों का एक जुमला नहीं, बल्कि ज़िंदगी का वह सबसे ख़ूबसूरत एहसास है जिसमें
Read Moreसनातन संस्कृति में काल गणना केवल समय का बोध नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और परमात्मा के बीच के गहन
Read More“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात् जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। हमारी मातृभूमि केवल मिट्टी का एक टुकड़ा
Read Moreसाहित्य केवल शब्दों का जोड़ या कोरी कल्पनाओं का आख्यान नहीं है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की अंतरात्मा की
Read Moreप्रिय अमन,मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा,तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने
Read Moreनाराज़ है जो तु तो मैं भी बेचैन बड़ा हूं,बेरुखी का सबब मुझको बता भी देना, जा रहे हो तर्क
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