स्वास्थ्य

स्वास्थ्य और दीर्घायु का आधार : अनुशासित जीवनशैली

जीवन के साठ से अधिक वसंत देख लेने के बाद भी फिटनेस और एक अनुशासित दिनचर्या के प्रति सजग रहना वाकई एक प्रेरणादायक सोच है। इस उम्र में स्वास्थ्य का तात्पर्य किसी भारी कसरत या कठिन व्यायाम से नहीं, बल्कि शरीर में निरंतर ऊर्जा, मांसपेशियों में लचीलापन और मन में गहरी शांति बनाए रखने से है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारा शरीर एक निश्चित प्राकृतिक लय और ठहराव की मांग करता है। इस अवस्था में दिनचर्या को जितना नियमित और व्यवस्थित रखा जाएगा, शरीर की पाचन क्रिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता और नींद की गुणवत्ता उतनी ही बेहतरीन बनी रहेगी। एक आदर्श और अनुशासित जीवन की शुरुआत सूर्योदय के साथ ही हो जाती है, जहाँ सुबह उठते ही सबसे पहले गुनगुना पानी पीने से शरीर के भीतर के अंग सक्रिय होते हैं और विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसके बाद हल्की धूप में की जाने वाली सैर न केवल हृदय को मजबूती देती है बल्कि हड्डियों के लिए अनिवार्य विटामिन-डी की कमी को भी पूरा करती है। सुबह की इस ताजी हवा के बाद अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसे प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं तथा मानसिक तनाव को पूरी तरह दूर कर देते हैं। जोड़ों को सक्रिय रखने के लिए हल्के स्ट्रेचिंग या सूक्ष्म व्यायाम इस उम्र के लिए सर्वोत्तम माने गए हैं।

दिन के मध्य में शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए दोपहर के भोजन के बाद लगभग आधे घंटे की एक संक्षिप्त झपकी या पावर नैप ली जा सकती है, जो मस्तिष्क को तरोताजा कर देती है, बशर्ते यह गहरी नींद में न बदले ताकि रात का शयन चक्र प्रभावित न हो। शाम का समय प्रकृति के सानिध्य में बिताने, संगीत सुनने या परिवार के साथ खुलकर संवाद करने के लिए होना चाहिए, क्योंकि मानसिक सुकून भी शारीरिक फिटनेस का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। अंततः, रात को सही समय पर बिस्तर पर चले जाना ताकि शरीर को कम से कम सात से आठ घंटे की गहरी और आरामदायक नींद मिल सके, पूरे दिन की थकान को मिटाकर अगले दिन के लिए एक नई ऊर्जा का संचार करता है।

“बढ़ती उम्र में भोजन केवल स्वाद का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और दीर्घायु की औषधि है।”

उम्र के इस पड़ाव पर शरीर का मेटाबॉलिज्म स्वाभाविक रूप से थोड़ा धीमा हो जाता है, इसलिए आहार ऐसा होना चाहिए जो पचने में बेहद आसान हो और पोषण से पूरी तरह भरपूर हो। सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो पौष्टिक और पर्याप्त होना चाहिए, जिसमें ओट्स, दलिया, पोहा, उपमा या मूंग दाल के चीले के साथ भीगे हुए बादाम और अखरोट शामिल किए जा सकते हैं। दोपहर का भोजन पूर्णतः सादा और संतुलित होना चाहिए, जिसमें चोकरयुक्त या मल्टीग्रेन आटे की रोटियां, हरी मौसमी सब्जियां, प्रोटीन से भरपूर दालें और साथ में ताजा दही या छाछ के साथ सलाद का होना अनिवार्य है। शाम के समय भूख लगने पर भारी स्नैक्स की जगह भुने हुए मखाने, चना या कोई भी मौसमी फल जैसे पपीता और सेब एक बेहतरीन विकल्प बनते हैं, जबकि इस दौरान चाय या कॉफी का सेवन न्यूनतम रखना चाहिए। रात का भोजन सूर्यास्त के आसपास या सोने से कम से कम दो घंटे पहले हो जाना चाहिए, जो बिल्कुल हल्का जैसे खिचड़ी, दलिया या सूप के रूप में हो। रात को सोने से ठीक पहले हल्दी वाले गुनगुने दूध का सेवन जोड़ों के दर्द को दूर रखने और एक आरामदायक नींद लाने में रामबाण की तरह काम करता है।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए जितना जरूरी सही खान-पान है, उतना ही जरूरी कुछ चीजों से परहेज करना भी है। इस उम्र में मैदा, अत्यधिक तेल-मसाले, तली-भुनी चीजों, सफेद चीनी, अतिरिक्त नमक और डिब्बाबंद या बासी भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि ये शरीर में सूजन और अपच का कारण बनते हैं। इसके अतिरिक्त, उम्र के साथ अक्सर प्यास लगने का अहसास कम होने लगता है, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ता है; अतः बिना प्यास लगे भी दिनभर में आठ से दस गिलास पानी, नारियल पानी या छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन निरंतर करते रहना चाहिए। कैल्शियम और प्रोटीन की कमी से हड्डियों को बचाने के लिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन-डी और बी-12 के स्तर की जांच कराना और आवश्यकतानुसार सप्लीमेंट्स लेना एक समझदारी भरा कदम है।

इन सब शारीरिक नियमों के साथ-साथ मानसिक रूप से सकारात्मक और व्यस्त रहना सबसे बड़ी औषधि है। अपनी रुचि के कार्यों जैसे बागवानी, पढ़ना-लिखना या पुरानी सुंदर यादों को सहेजना, इंसान को भीतर से जीवंत बनाए रखता है, क्योंकि एक खुशमिजाज और संतुष्ट दिल शरीर को हमेशा युवा रखता है। इस नई और स्वास्थ्यवर्धक दिनचर्या की शुरुआत धीरे-धीरे और सहजता से की जानी चाहिए, और यदि पहले से कोई मेडिकल कंडीशन जैसे ब्लड प्रेशर या शुगर हो, तो आहार और जीवनशैली में किसी भी बड़े बदलाव से पूर्व अपने पारिवारिक चिकित्सक की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए। जीवन का यह दौर स्वास्थ्य, गरिमा और आत्मिक आनंद के साथ जीने का है।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह ‘सहज’

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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