ग़ज़ल
जिनको समझा रहबर वही रहज़न निकले,राह-ए-मंज़िल में जो काँटे ही बिछा देते हैं। देखिए दहर की बे-मेहर ओ जफ़ा की
Read Moreशाम की छाया गहरी हो रही थी। महाविद्यालय की उस पुरानी और ऐतिहासिक पुस्तकालय की खिड़की से बाहर का दृश्य
Read Moreसुरों की मल्लिका सुमन कल्याणपुर (सुमन हेमाड़ी)का जीवन और उनका संगीत-सफ़र सादगी, समर्पण और अद्वितीय उपलब्धियों की एक अनूठी मिसाल
Read Moreप्रकृति के इन मूक रक्षकों, आदि-काल से अडिग खड़े विराट महाशिखरों और अपनी अनंत हरी छांव में सदियों से एक
Read Moreपहाड़ों का सीना चीरकर जोचश्मे बाहर आते हैं,वे पानी का बहाव नहीं, धरतीकी धड़कन बन जाते हैं।जब टकराते हैं राहों
Read Moreशहरों की अंधी दौड़ से जबथककर चूर होते हैं,तब इन अडिग पहाड़ों के हमथोड़े करीब होते हैं।ये वीर वन,ये ऊंचे
Read Moreझुक कर ज़रा वो मस्त निगाहें मिला के ला,साग़र में अक्स-ए-ज़ुल्फ़ का जादू जगा के ला। कहते हैं बज़्म-ए-शौक़ में
Read Moreआज का मानव विकास और तकनीक के शिख़र पर बैठकर भी भीतर से अत्यंत अशांत और बेचैन है। हम एक
Read Moreइतिहास, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के मामले में हमारा समाज जितना प्राचीन और समृद्ध रहा है, दुर्भाग्य से यहाँ अंधविश्वास,
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