अब तुझको मैं हकी़क़त कर दूं,
जी में आता है के अब तर्क मुहब्ब्त कर दूं,ख़त तेरे सारे ही, हवाओं के हवाले कर दूं, तकाज़ा ए
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Read Moreजीवन के सफर में इंसान अनगिनत रिश्तों से रूबरू होता है,कुछ खून के रिश्ते होते हैं, तो कुछ समय के
Read Moreग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल
Read Moreप्रकृति के इन मूक रक्षकों, आदि-काल से अडिग खड़े विराट महाशिखरों और अपनी अनंत हरी छांव में सदियों से एक
Read Moreजिंदुगी की इमारत में अगर माँ वो नर्मो-नाज़ुक और पुरख़ुलूस छाँव है जो औलाद को धूप की हर तपिश से
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Read Moreजो ज़ख़्म दिल को मिले, हम छुपाए बैठे हैं,ज़ीस्त अपनी तमाम महफ़िलमें लुटाए बैठे हैं। वो आ के पूछ रहे
Read Moreदिन ढलते ही शहर की रौनक बदल जाती थी। एक तरफ़ इत्र की ख़ुशबू और दूसरी तरफ घुंघरूओं की झनकार।
Read Moreशाम का सहर तारी था, और कमरे में रखी पुरानी मेज़ लैंप की धीमी रोशनी में नहाई हुई थी। अनवर,
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