जब उसे हक़ीक़त पता चली
कॉलेज के वो दिन भी क्या ख़ूबसूरत होते हैं, जहाँ किताबों के पन्नों से ज़्यादा नज़रें हसीन चेहरों के मुताले
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Read Moreदिल्ली की गलियां और वो पुर-असरार चेहरा पुरानी दिल्ली की वो तंग और तारीख़ (अंधेरी) गलियां, जहां हवाओं में आज
Read Moreकेरल के घने और हरे-भरे मन्नार के जंगलों के बीच से गुज़रती वह सड़क किसी भूल-भुलैया से कम न थी।
Read Moreआज हम उस युग में जी रहे हैं जिसे ‘डिजिटल क्रांति’ का नाम दिया गया है। सूचना का विस्फोट कुछ
Read Moreतेज़ धूप का आलम देखो, न साया है न राहत है,हवाएं गरम हैं कितनी, उफ़ कैसे उड़ते फिरते हैं।उनके नन्हे
Read Moreख़्वाब पलकों पे सजाएँ तो सँवर जाते हैंहम तो ख़ुशबू की तरह हद से गुज़र जाते हैं।यह जो मुँठी में
Read Moreआंखों में रहे अश्क़ जज़्बात ने रुकने न दियाबात थी मेरी ज़ुबाँ पर, लबों ने हिलने न दियाबस इक लम्हा
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