ख़तरनाक फ़रेब
शाम का वक्त था और पार्क के सुनहरी साए लंबे हो रहे थे। हवा में एक अजीब सा उदास सुकून
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Read Moreशाम का वक्त था, कमरे में मद्धम रोशनी जल रही थी। मेज़ पर अबू की पुरानी डायरी रखी थी, जिसके
Read Moreवह सुनहरी दोपहर थी जब दफ़्तर में दाख़िल हुआ और काग़ज़ पर नज़र डाली, तो पलट कर देखा कि सामने
Read Moreजीवन का सफ़र बहुत लंबा और उतार-चढ़ाव से भरा हुआ है, और इस रास्ते पर चलते हुए हमारा कई तरह
Read Moreवर्तमान समय में देश के भीतर सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक स्तर पर जो एक तीव्र हलचल और मंथन का दौर
Read Moreदिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर केवल पत्थरों और चौराहों का एक भूभाग मात्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की अंतरात्मा
Read Moreबात उन दिनों की है जब कैलेंडर के पन्ने साल 1982 पर ठहरे हुए थे। मैं श्री नीलकंठेश्वर महाविद्यालय, खंडवा
Read More“औकात” शब्द का अर्थ अक्सर लोग धन-दौलत, पदवी या पारिवारिक विरासत तक सीमित मान लेते हैं, जिसके अहंकार में वे
Read Moreसोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर किया गया अनशन मात्र एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के उस जीवंत और
Read Moreकिसी भी राष्ट्र की प्रगति उसकी भावी पीढ़ियों के हाथों में होती है, और भावी पीढ़ियों का निर्माण ‘शिक्षा के
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